डीएम के जनता दरबार में मायूस दिखे फरियादी, भगवान भरोसे कार्रवाई की लगाई उम्मीद
नन्दकिशोर दास
बेगूसराय ब्यूरो। बिहार सरकार के सात निश्चय 3 कार्यक्रम के तहत "सबका सम्मान, जीवन आसान" के अंतर्गत शुक्रवार समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला पदाधिकारी श्रीकांत शास्त्री द्वारा जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं पंचायतों से आए लोगों ने अपनी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन डीएम को दिया।
जिला पदाधिकारी के जनता दरबार में उस वक्त अजीबोगरीब देखने को मिला कि "सबका सम्मान, जीवन आसान" के तहत करीब-करीब दरबार में पहुंचे आधे फरियादियों को कुर्सी पर बैठाया गया और आधे को बाहर में अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया। इस बीच बिना फरियादियों से पूछे या जानकारी लिए बगैर आवेदनों पर सिर्फ संबंधित प्रखंड या अनुमंडल पदाधिकारियों के नाम से फोरवार्ड करते गये। कुछ आवेदनों को फरियादियों को सुपुर्द करते गए वहीं कुछ आवेदनों को अपने टेबुल पर रखते गये। बाद में उस आवेदनों को समाहरणालय के कमरा नंबर-9 में संचालित गोपनीय शाखा भेजा गया, जहां जनता दरबार के नाम से पर्ची का वितरण किया गया। जनता दरबार में पहुंचे फरियादियों ने बताया कि उन्हें हमेशा सीओ के नाम से अनुशंसा करते हैं, पर सीओ डीएम के आदेश को कुछ समझते ही नहीं हैं। एक महिला ने बताया कि सीओ उन्हें मौखिक और लिखित रूप में आवासीय प्रमाणपत्र निर्गत करवाने को कहा, पर अबतक जनता दरबार में न्याय के लिए चक्कर लगा रही हूं।
ये खबर भी पढ़े : खान सर की कोचिंग के बाहर देर रात फायरिंग, इलाके में मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटीएक सज्जन ने नाम नहीं छापने के सवाल पर बताया कि उन्हें हाईकोर्ट से किसान सलाहकार के पद योगदान कराने का आदेश प्राप्त है। कई जिलाधिकारी के जनता दरबार में हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में योगदान करवाने की प्रार्थना की है। डीएम आवेदनों पर अनुशंसा कर देते हैं। लेकिन जिला कृषि पदाधिकारी उस अनुशंसा को मुनासिब नहीं समझते हैं। अब देखना है कि इस जनता दरबार में क्या कार्रवाई होती है। आयोजित जनता दरबार में कुल 51 आवेदन प्राप्त हुए। जिनमें अधिकांश मामले भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, सीमांकन, अतिक्रमण एवं अन्य राजस्व संबंधी मामलों से जुड़े थे। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, लोक सेवाओं, प्रमाण-पत्र निर्गत करने, जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ एवं अन्य जनहित से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई की गई। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, जवाबदेह एवं संवेदनशील प्रशासन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन अपनी प्रतिबद्धता बताती है। लेकिन यह कहां तक संभव है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में आठ वर्षों का अनुभव रखने वाले नंद किशोर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बेगूसराय–पटना ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। बिहार में आधारित रहते हुए वह क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों की तथ्यपरक कवरेज कर रहे हैं।
