सुपौल थाने के मालखाने से 6162 कफ सिरप बोतलें गायब, कई पुलिसकर्मी गिरफ्तार
सुपौल। बिहार में शराबबंदी और नशा विरोधी अभियान के बीच सुपौल जिले के प्रतापगंज थाना से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि थाना मालखाने में जब्त कोडीन युक्त कफ सिरप की हजारों बोतलें गायब कर अवैध रूप से बेची जा रही थीं।
मामले के खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और कई कर्मियों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस मुख्यालय को मिली गुप्त सूचना के बाद गठित विशेष जांच टीम ने प्रतापगंज थाना के मालखाने का निरीक्षण किया।
जांच में पता चला कि एक मामले में जब्त 7560 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप में से 8 बोतलें एफएसएल जांच के लिए भेजी गई थीं। इस हिसाब से मालखाने में 7552 बोतलें होनी चाहिए थीं, लेकिन मौके पर केवल 1390 बोतलें ही मिलीं। जांच में 6162 बोतलों के गायब होने की पुष्टि हुई।
जांच टीम को मालखाने में 2842 ऐसी कफ सिरप बोतलें भी मिलीं, जिनका बैच नंबर, ब्रांड और निर्माण वर्ष जब्त माल से अलग था। अधिकांश बोतलों का निर्माण वर्ष 2026 पाया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि गायब स्टॉक की भरपाई दिखाने के लिए दूसरे ब्रांड की नई बोतलें रखी गई थीं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि थाना परिसर में जब्त वाहनों के टायर, ई-रिक्शा (टोटो) की बैटरियां, डायनेमो समेत अन्य सामान भी गायब किए गए थे। मामले को और संदिग्ध तब माना गया जब संबंधित अवधि का सीसीटीवी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
ये खबर भी पढ़े : पटना: ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद के भाई की नेपाल में संदिग्ध हालत में मौतपूछताछ में गिरफ्तार चौकीदार राहुल कुमार ने कथित तौर पर कई अहम जानकारियां दी हैं। उसके अनुसार, त्रिवेणीगंज निवासी आशीष नामक व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद मालखाने से कफ सिरप निकालकर बेचने का काम शुरू हुआ।
इस अवैध गतिविधि में अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल-112 चालक अखिलेश कुमार के शामिल होने का भी आरोप है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रात के समय मालखाने से कफ सिरप बाहर निकालकर सप्लाई की जाती थी और उससे प्राप्त राशि आपस में बांट ली जाती थी।
चौकीदार ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी जब्त शराब, कफ सिरप, बाइक के पार्ट्स और अन्य सामान बेच चुका है। एक लूटकांड में इस्तेमाल की गई बाइक को प्रभावशाली लोगों के दबाव में छोड़ने का आरोप भी सामने आया है।
मामले में प्रतापगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं चौकीदार राहुल कुमार, रंजन राज, मनीष कुमार और अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सुपौल के पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विशेष जांच कराई गई थी। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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