केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, बोले- 'राष्ट्रविरोधी ताकतों को फायदा नहीं उठाने देना चाहता'
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रविरोधी ताकतों को लाभ नहीं उठाने देना चाहिए और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में नहीं फंसना चाहिए। उनका इस्तीफा राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि छात्रों का समय पढ़ाई और अपने भविष्य के निर्माण में लगना चाहिए, न कि विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं में। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजने की जानकारी दी।
https://twitter.com/dpradhanbjp/status/2080938216505667663?s=20
हालांकि, इस्तीफा देने भर से वह प्रभावी नहीं हो जाता। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा तभी लागू माना जाता है, जब प्रधानमंत्री उसे स्वीकार कर लें। फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफा मंजूर या नामंजूर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ऐसे में अब सबकी नजर प्रधानमंत्री के फैसले पर है। सरकार की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद पर बने रहेंगे या उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा।
प्रवेश परीक्षाओं को लेकर तेज हुआ था विरोध
हाल के सप्ताहों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की।
सोनम वांगचुक के अनशन से आंदोलन को मिली गति
लद्दाख के शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर 20 दिन का अनशन किया। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। इसके बाद आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और विभिन्न राज्यों में छात्रों व संगठनों ने प्रदर्शन किए।
पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट बंदी पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने के आरोप लगे। राजधानी के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गईं, जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क और समन्वय प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के बाद आंदोलन और तेज हो गया तथा केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग बढ़ी।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि जहां-जहां परीक्षा संबंधी अनियमितताएं सामने आई हैं, वहां जांच एजेंसियों के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर
56 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान जुलाई 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे। इससे पहले वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा कौशल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता और पूर्व एबीवीपी कार्यकर्ता प्रधान को जून 2024 में मोदी सरकार के गठन के बाद दोबारा शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
