पेपर लीक पर कानून होगा सख्त, दस साल की जेल-दस करोड़ जुर्माना
संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, संसद में सोमवार को पेश करने की तैयारी
- प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा माफिया पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का उद्देश्य
नई दिल्ली। देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन आॅफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार संशोधन विधेयक को सोमवार को संसद में पेश कर जल्द पारित कराने की तैयारी में है।
प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा माफिया पर पहले से अधिक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। मौजूदा कानून में कई मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की सजा और दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है, जबकि संगठित गिरोहों द्वारा किए गए अपराधों में पांच से दस वर्ष तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के आर्थिक दंड का प्रावधान है। अब सरकार इन प्रावधानों को और कठोर बनाने जा रही है। सूत्रों के अनुसार संशोधित कानून के तहत गंभीर मामलों में दोषियों को अधिकतम दस वर्ष तक की कैद और दस करोड़ रुपये तक का जुमार्ना लगाया जा सकेगा। साथ ही सजा और आर्थिक दंड के दायरे को और प्रभावी बनाने के लिए कानूनी प्रावधानों में बदलाव किए जाएंगे।
सरकार मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को कानूनी आधार देने की तैयारी भी कर रही है। प्रस्ताव है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी की जाए, ताकि छात्रों को समय पर न्याय मिले और दोषियों को त्वरित सजा मिल सके। परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी पहले की तरह बनी रहेगी। यदि वे किसी संभावित गड़बड़ी या अपराध की सूचना समय पर नहीं देंगे तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई और भारी जुमार्ने का प्रावधान लागू रहेगा।
नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच बैठक हुई। बैठक में सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच तथा आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठाई। हालांकि इन मांगों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ, लेकिन दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
