पीएम मोदी का संदेश: 'बच्चे भटक सकते हैं, उन्हें सजा नहीं, सही दिशा चाहिए'
पीएम मोदी ने अभद्र भाषा बोलने वाले युवाओं को किया क्षमा, बोले— समाज उन्हें गले लगाए, अदालतों के चक्कर समाधान नहीं
नीरज अवस्थी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अभद्र भाषा किसी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन भटके हुए बच्चों को केवल दंडित करने से भी स्थिति नहीं बदलेगी। समाज और देश की जिम्मेदारी है कि उन्हें सही दिशा दिखाई जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन में गलतियां हो सकती हैं और यही वह उम्र होती है, जब सुधार की सबसे अधिक संभावना होती है। ऐसे बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाने या समाज में अपमानित करने के बजाय उन्हें समझाने, संस्कार देने और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं ऐसे बच्चों को क्षमा करते हैं और समाज से भी उन्हें अपनाने की अपील करते हैं।
ये खबर भी पढ़े : देशभर में 13,092 पीएम श्री स्कूल चयनित, क्षेत्रीय भाषाओं के लिए 9,152 शिक्षक नियुक्तप्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत माता के लिए भी अपमानजनक शब्द कहे गए, जो किसी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकते। इसके बावजूद उन्होंने प्रतिशोध की जगह संवेदनशीलता और मार्गदर्शन का रास्ता चुनने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि नफरत नहीं, संस्कार ही देश का भविष्य बदल सकते हैं।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे भारतीय संस्कृति में क्षमा, करुणा और संवाद की भावना का संदेश बता रहे हैं, जबकि विपक्ष ने भी इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
