अतिपिछड़ों के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण लेकर रहेगें: चंद्रशेखर आजाद
“सरकार आरक्षण का सिर्फ दिखावा कर रही है, असल नीयत उसे खत्म करने की है”
लखनऊ। आजाद समाज पार्टी के नगीना सांसद और फायर ब्रांड नेता चंद्रशेखर ने तरुणमित्र से हुई विशेष बातचीत में अति पिछड़ों के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण की मांग को फिर से जोरदार तरीके से दोहराया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार आरक्षण को सिर्फ दिखावे तक सीमित रखे हुए है, जबकि उसकी असली नीयत आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करने की है। सांसद ने ओबीसी अधिकारों, मंडल कमीशन की अधूरी सिफारिशों, युवा आंदोलनों और आरक्षण के व्यापक विस्तार पर विस्तार से अपनी बात रखी।
प्रश्न: आप पिछले कई वर्षों से अति पिछड़ों के लिए अतिरिक्त आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। अभी भी यही मांग दोहरा रहे हैं। वर्तमान सरकार आरक्षण के मुद्दे पर क्या कर रही है?
उत्तर: देखिए, सरकार आरक्षण सिर्फ दिखावा कर रही है। वास्तव में उसकी नीयत आरक्षण समाप्त करने की है। कागजों पर कुछ घोषणाएं हो जाती हैं, भाषण हो जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। हम ओबीसी के लिए पहले से प्राप्त 27 प्रतिशत आरक्षण के अतिरिक्त अति पिछड़ों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह हमारी स्पष्ट और अडिग मांग है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, हम पीछे नहीं हटेंगे।
प्रश्न: ओबीसी समुदाय के अधिकारियों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर आपकी लड़ाई कितनी दूर तक जाएगी?
उत्तर: हम ओबीसी के अधिकारियों की लड़ाई वहां तक लड़ेंगे जहां तक सरकार ने सोचा भी नहीं होगा। सरकार शायद सोचती है कि कुछ पदों पर आरक्षण देकर या कुछ बैठकें करके मामला निपट जाएगा। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम ओबीसी अधिकारियों के हक की लड़ाई को हर मोर्चे पर लड़ेंगे। सिर्फ नौकरी के आरक्षण से काम नहीं चलेगा। सरकार यह न सोचे कि केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित रखकर सब कुछ ठीक हो जाएगा। हम इस आरक्षण को न्यायपालिका, विधायिका समेत सभी प्राइवेट संस्थानों तक लागू करने का काम करेंगे। जब तक आरक्षण सिर्फ सरकारी नौकरियों तक सीमित रहेगा, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा ही रहेगा। प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लागू होना चाहिए, न्यायपालिका में भी और विधायिका में भी।?
प्रश्न: छात्रों और युवाओं के आंदोलनों को लेकर सरकार का रवैया आपको कैसा लग रहा है? कई जगहों पर युवा सड़कों पर हैं।
उत्तर: सरकार युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। यह बहुत गलत है। सरकार को समझाना पड़ेगा कि देश का युवा देश का भविष्य है। उसके साथ खिलवाड़ सरकार को महंगा पड़ेगा। युवा जब अपनी जायज मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो सरकार को उन्हें सुनना चाहिए, न कि दबाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर सरकार युवाओं की आवाज को कुचलने की कोशिश करती रही तो उसका परिणाम बहुत बुरा होगा। युवाओं के साथ खिलवाड़ कोई भी सरकार नहीं कर पाएगी।?
प्रश्न: मंडल कमीशन की सिफारिशों का क्या हुआ? क्या वे पूरी तरह लागू हो गईं?
उत्तर: मंडल कमीशन ने कुल 40 सिफारिशें दी थीं। इनमें से सिर्फ दो सिफारिशें ही लागू हुई हैं। बाकी 38 सिफारिशें आज भी धूल चाट रही हैं। हम इन अन्य 38 सिफारिशों को लागू करने के लिए जन आंदोलन खड़ा करेंगे। हम इन 38 सिफारिशों को लागू कराकर ही मानेंगे। अधूरी सिफारिशों से सामाजिक न्याय अधूरा रह जाता है। मंडल कमीशन की पूरी भावना को लागू करना हमारी प्राथमिकता है। जब तक बाकी सिफारिशें लागू नहीं होतीं, तब तक हम संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रश्न: आप आरक्षण को न्यायपालिका और विधायिका तक बढ़ाने की बात कर रहे हैं। क्या यह व्यावहारिक है?
उत्तर: यह न सिर्फ व्यावहारिक है, बल्कि जरूरी भी है। जब तक सत्ता और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में सामाजिक विविधता नहीं आएगी, तब तक असली बदलाव नहीं आएगा। हम इस दिशा में काम करेंगे। प्राइवेट संस्थानों में भी आरक्षण लागू होना चाहिए। सरकार को यह समझना होगा कि आरक्षण सिर्फ नौकरियों तक सीमित रखने से सामाजिक असमानता दूर नहीं होगी।बातचीत के दौरान चंद्रशेखर रावण का रुख बहुत स्पष्ट और आक्रामक रहा। उन्होंने बार-बार दोहराया कि अति पिछड़ों के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण, ओबीसी अधिकारों का विस्तार और मंडल कमीशन की बाकी सिफारिशों को लागू कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर आरक्षण को सिर्फ दिखावे तक सीमित रखेगी तो उन्हें लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा। नगीना सांसद ने आखिर में कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है।
