भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को भरेंगे अंतरिक्ष उड़ान, ISS मिशन पर जाएंगे
ISS पर वैज्ञानिक प्रयोगों और शोध कार्यों में हिस्सा लेंगे।
- अनिल मेनन 14 जुलाई को सोयुज एमएस-29 से अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे।
- वे भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री हैं।
- मिशन की अवधि लगभग आठ महीने होगी।
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को कजाखस्तान स्थित बैकानूर अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए आठ महीने के मिशन पर रवाना होंगे। 49 वर्षीय मेनन भारतीय मूल के हैं।
इस आशय की विज्ञप्ति नासा की वेबसाइट पर नौ जुलाई को साझा की गई है। विज्ञप्ति के अनुसार, मिनियापोलिस में यूक्रेनी और भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे मेनन आपातकालीन चिकित्सा के चिकित्सक और अमेरिकी अंतरिक्ष बल में कर्नल हैं।
नासा की विज्ञप्ति के अनुसार, अनिल मेनन, कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ रोस्कोस्मोस के सोयुज एमएस-29 स्पेसक्राफ्ट से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरेंगे।
ये खबर भी पढ़े : सवा लाख आवादी वाले सेशेल्स में गूंजा भारतीय सेना का गौरव, पीएम मोदी ने खड़े होकर किया सलामवहां वे 'एक्सपीडिशन 74' क्रू के साथ मिलकर वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे। उत्तरी अमेरिका के समयानुसार तीनों सुबह 10:47 बजे (बैकोनूर समय के अनुसार शाम 7:47 बजे) उड़ान भरेंगे।
इसका लाइव कवरेज नासा, अमेजन प्राइम और नासा के यू-टूयूब चैनल पर उपलब्ध होगा। नासा ने साफ किया है कि इस कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।
अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन, डुब्रोव और किकिना अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटने से पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 'एक्सपीडिशन 74/75' क्रू सदस्यों के तौर पर ऑर्बिटल कॉम्प्लेक्स में लगभग आठ महीने बिताएंगे। मेनन की यह पहली, डुब्रोव और किकिना की यह दूसरी अंतरिक्ष उड़ान होगी।
इस दौरान मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने प्रवास के दौरान वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। इनमें लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का मानव शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक प्रभावों का अध्ययन तथा यह जांच शामिल होगी।
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