मांगें राम चौहान ने प्रकृति संरक्षण पर दिया संदेश, बोले प्रकृति परिवार है, संपत्ति नहीं
पेड़, पौधे, पक्षी, कीट, पशु और मनुष्य—ये सब इस धरती के एक ही विशाल परिवार के सदस्य हैं। यह केवल भावनात्मक विचार नहीं, बल्कि विज्ञान, संस्कृति और दर्शन का भी मूल सत्य है। प्रकृति का हर तत्व एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है और इसी जुड़ाव से जीवन का संतुलन कायम रहता है।
इकॉलोजी हमें सिखाता है कि पृथ्वी पर जीवन एक जटिल जाल की तरह फैला है, जिसमें हर जीव की अपनी भूमिका है। एक छोटा कीट फूलों का परागण करता है, पक्षी बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, पशु जंगलों का संतुलन बनाए रखते हैं और सूक्ष्म जीव मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। यदि इस श्रृंखला की एक भी कड़ी कमजोर हो जाए, तो पूरा तंत्र प्रभावित होता है।
भारतीय संस्कृति ने सदियों पहले इस सत्य को वसुधैव कुटुम्बकम के रूप में स्वीकार किया—अर्थात “संपूर्ण विश्व एक परिवार है।” यही भावना अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का आधार बनी। महात्मा गाँधी, रवीन्द्र नाथ टैगोर और विनोबा भावे जैसे महान विचारकों ने प्रकृति को माता मानकर उसके संरक्षण का संदेश दिया।
लेकिन आधुनिक विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य इस रिश्ते को भूलता जा रहा है। पेड़ों को केवल लकड़ी, नदियों को केवल जल और पशुओं को केवल संसाधन समझने की प्रवृत्ति ने पृथ्वी को संकट में डाल दिया है। जंगल कट रहे हैं, जैव विविधता घट रही है और Climate Change का खतरा बढ़ता जा रहा है।
यदि हम सच में मान लें कि सभी जीव हमारे परिवार हैं, तो हमारा व्यवहार स्वतः बदल जाएगा। हम पेड़ लगाएंगे, जल बचाएंगे, पशु-पक्षियों के प्रति दया रखेंगे और प्रकृति का सम्मान करेंगे। यही परिवार-भाव हमें न केवल पर्यावरण संरक्षण की ओर ले जाएगा, बल्कि मानसिक शांति, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा भी देगा।
अंततः, मनुष्य इस पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान सदस्य है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी सबसे बड़ी है। हमें प्रकृति को लूटना नहीं, संवारना है। जब हम हर जीव में अपना अंश देखेंगे, तभी सच्चे अर्थों में मानवता का धर्म पूरा होगा। सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधे हमारे परिवार हैं। इन्हें बचाना ही स्वयं को बचाना है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
