कोरोना काल ने तोड़ी कमर, अब मिले टैक्स राहत की ‘वैक्सीन’!

बजट 2021-22 से राजधानी के व्यापार जगत की गुहार

लॉकडाउन के दौरान बैंकों द्वारा आरोपित ब्याज माफी की मांग

टर्न ओवर कलेक्शन नामक नये कर को खत्म करने की डिमांड

वन नेशन-वन टैक्स फॉर्मूले को तर्कसंगत ढंग से लागू करने पर जोर

लखनऊ। बीते मार्च से कोरोना काल का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसके संक्रमण की रफ्तार भले ही अब काफी कम हो गई हो…उससे निपटने के लिये सरकार ने वैक्सीनेशन प्रक्रिया शुरू कर दी हो, मगर राजधानी का व्यापार जगत अभी भी कोरोना काल के दौरान उपजे आर्थिक पीड़ा से नहीं उबर पाया है। राजधानी के प्रमुख व्यापारी प्रतिनिधियों का स्पष्ट रूप से यही कहना है कि अब जमीनी और व्यवहारिक रूप से सरकार को कारोबार जगत के लिये समुचित राहत भरे कदम उठाने चाहिये। खैर, वर्ष 2021-22 का आम बजट सोमवार एक फरवरी को पेश होने जा रहा है जिसको लेकर व्यापारियों ने काफी उम्मीदें लगा रखी हैं।
इस विषय पर दी लखनऊ आयरन, हार्डवेयर एंड पेंट्स मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ कारोबारी सतीश अग्रवाल का कहना है कि सबसे पहले तो इस बार के आम बजट में आयकर स्लैब में कमी करनी चाहिये। साथ ही खासकर छोटे व मझोले व्यापारियों को राहत देते हुए बैंकों ने जो कोरोना काल में बराबर ब्याज आरोपित कर रखा था, सरकार को उसे त्वरित पहल करते हुए खत्म कर देना चाहिये ताकि हमारे ऐसे कारोबारी फिर से उबर सकें। इसी क्रम में उप्र युवा व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष अतुल कुमार जैन ने कहा कि इस आम बजट में आयकर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर डेढ़ लाख से बढ़ाकर तीन लाख किया जाना चाहिये। आगे कहा कि जीएसटी प्रक्रिया का सरलीकरण होना चाहिये और वन नेशन, वन टैक्स के फार्मूले को तर्कसंगत ढंग से लागू करना चाहिये। इसके अलावा पीएम मोदी के आत्मनिर्भर अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर बैंकों की बराबर मॉनीटरिंग की जानी चाहिये ताकि इसका समुचित लाभ जरूरतमंदों को मिल सके। लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि बीते हालात को देखते हुए इस बार के आम बजट से कुछ खास उम्मीदें तो नहीं हैं। मगर कोरोना काल के दौरान सरकार ने जो टीसीएस (टर्न ओवर कलेक्शन) नामक जो नया कर आरोपित करना शुरू किया है, उससे तो राहत मिलनी ही चाहिये। उन्होंने बताया कि इस नये कर के तहत 50 लाख से अधिक का टर्नओवर है तो संबंधिता व्यापारी को इसके तहत .075 फीसद टैक्स सरकार के खाते में हर हाल में अदा करना होता है जोकि न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। वहीं उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल लखनऊ के नगर अध्यक्ष व भूतनाथ कारोबारी धर्मेंद्र गुप्ता ने कहा कि बजट में यह प्रावधान बनाया जाये कि बैंकों ने जो अलग-अलग तरीके से व्यापार जगत पर अधिभार लगा रखे हैं, वो खत्म किये जायें। 60 साल से अधिक के बुजुर्ग कारोबारियों की पेंशन 30 हजार की जाये और रेल यात्रा में भी पंजीकृत कारोबारियों को कोटा दिया जाये। उनके साथ कुछ ऐसी ही मांगें वरिष्ठ महामंत्री ज्ञान प्रकाश सिंह, महामंत्री कमल अग्रवाल, अभिषेक गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय पटेल, प्रियम, अभय, मनीष, अरशद, अंशुल और युवा कारोबारी अमन पाटिल ने भी की।

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