कच्चे तेल में उबाल, ब्रेंट 99 डॉलर के पार; भारत पर बढ़ा दबाव
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भी लगातार तेजी का रुख बना हुआ है।
इस तेजी के कारण ब्रेंट क्रूड आज उछल कर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के काफी करीब पहुंच गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच कर कारोबार करता नजर आया।
आज ब्रेंट क्रूड ने सपाट स्तर पर 0.03 डॉलर की मामूली तेजी दिखाते हुए 97.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। हालांकि ट्रेडिंग शुरू होते ही ये फिसल कर 96.81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आया लेकिन थोड़ी देर बाद इसकी चाल में तेजी गई।
भारतीय समय के मुताबिक शाम तीन बजे के कुछ देर बाद ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 99.37 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद इसकी कीमत में थोड़ी गिरावट भी आई।
भारतीय समय के अनुसार शाम छह बजे तक का कारोबार होने के बाद ब्रेंट क्रूड 1.56 डॉलर प्रति बैरल यानी 1.61 प्रतिशत की तेजी के साथ 98.72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड ने आज 1.06 डॉलर प्रति बैरल उछल कर 92.54 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की।
ओपनिंग के तुरंत बाद ये गिर कर थोड़ी देर के लिए 90.87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया, लेकिन इसके बाद इसकी चाल में तेजी आ गई। कुछ देर में ही यह उछल कर 94.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि बाद में इसके भाव में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। भारतीय समय के अनुसार शाम छह बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.36 डॉलर प्रति बैरल यानी 2.58 प्रतिशत की उछाल के साथ 93.84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में आई ये तेजी भारत जैसे ऑयल इंपोर्टर देश की अर्थव्यव्स्था को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रविचंदर खुराना का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत के इंपोर्ट बिल को काफी बढ़ा सकती है।
खुराना का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 71 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
साफ है कि उस समय से अभी तक की अवधि में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी होने से इंपोर्ट बिल तो बढ़ ही रहा है, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमत में हुई बढ़ोतरी के कारण पहले भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी करना पड़ा था।
अब अगर कच्चे तेल की कीमत में ये तेजी जारी रही तो एक बार फिर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं।
ऐसा होने पर महंगाई भी बढ़ेगी। आम जरूरत की चीजों के भाव पर इसका सीधा असर पड़ेगा और इससे आम लोगों का बजट बिगड़ जाएगा।
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लेखक के बारे में
माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
