सभी दलों के विधायकों ने पूर्व विधायक की मनाई श्रद्धांजलि सभा, दो मिनट का रखा मौन

सभी दलों के विधायकों ने पूर्व विधायक की मनाई श्रद्धांजलि सभा, दो मिनट का रखा मौन

कोचस (रोहतास) प्रखंड के हरिदासपुर गांव के समाजवादी, सादगी एवं सहजता के प्रतीक, सिद्धान्त एवं व्यवहार के बीच समीकरण स्थापित करने वाले गाँधीवादी स्व० शिवपूजन सिंह की दो मिनट रख कर दी गई श्रद्धांजलि सभा जिसकी अध्यक्षता जानकी भगत संचालन अधिवक्ता शिव जी सिंह ने किया।शिवपूजन सिंह का निधन दिनांक 30 नवम्बर, 2023, दिन गुरुवार को उनके पैतृक गाँव - हरिदासपुर (दिनारा) में हो गया। शिवपूजन सिंह जैसे ईमानदार, कर्मठ तथा समाजवाद के संरक्षक! लोहियावाद में आस्था एवं विश्वास रखने वाले स्व० शिवपूजन बाबू का जन्म 03 जनवरी, 1941 को हरिदासपुर (दिनारा) में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व० वंशरोपन सिंह एवं माता का नाम स्व० बौधा देवी था। एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्मे स्व० शिवपूजन बाबू किसानों की समस्याओं से प्रतिदिन रू-ब-रू होते थे, जिसका गहरा प्रभाव उनके राजनीतिक जीवन पर पड़ा।स्व० लालमुनि सिंह, शिवपूजन बाबू के छाटे भाई थे, जिनकी मृत्यु कैंसर से हो गयी। डा० उषा उनकी इकलौती छोटी बहन हैं।स्व० शिवपूजन सिंह जी की शादी धनवती देवी ग्राम-सबदलपुर,थाना- कुदरा, जिला-कैमूर, के साथ हाई स्कूल की परीक्षा पास करने के पूर्व ही हो गयी थी। उनसे प्रमोद कुमार सिंह उर्फ श्यामनारायण सिंह पुत्र और रमता देवी, पुत्री पैदा हुयीं। शिक्षा : शिवपूजन बाबू की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में ही हुई थी। सन् 1958 में उच्च विद्यालय, कोचस, शाहाबाद (अब रोहतास) से हाई स्कूल की परीक्षा; वर्ष 1962 में शान्ति प्रसाद जैन कॉलेज, सासाराम से स्नातक की परीक्षा तथा वर्ष 1964 में उन्होंने पटना विश्वविद्यालय, पटना से हिन्दी में एम० ए० की परीक्षा पास की थी। उसके बाद उन्होंने बी० एड० भी किया। प्रायः प्रत्येक परीक्षा में उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उस जमाने में प्रथम श्रेणी लाना कोई साधारण बात नहीं थी।योग्यता व्यक्ति के अन्दर स्वाभिमान पैदा करती है। स्वाभिमानी व्यक्ति स्वयं न तो कोई गलत काम करता है और न तो दूसरों को करने की इजाजत ही देता है। स्व० शिवपूजन बाबू का सम्पूर्ण जीवन इसका उदाहरण रहा है। सहकारिता बैंक, जहानाबाद में अपने ही अधीनस्थ कार्यरत एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के साथ बैंक के उच्चाधिकारियों द्वारा किये जा रहे अन्यायपूर्ण व्यवहार के विरोध में उन्होंने अपने पद से त्याग - पत्र दे।दिया था। वे बैंक में लैण्ड वैल्यूएशन पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उसके बाद वे कभी भी सरकारी नौकरी की तरफ मुड़कर नहीं देखा।राजनीति, समाज की एक जरूरत है, आधार नहीं। मजबूत समाज के प्रायः हर अंग मजबूत होते हैं। समाज अथवा व्यक्ति शिक्षा से मजबूत होता है, धन सम्पत्ति अथवा राजनीति से नहीं। शिवपूजन बाबू का व्यक्तित्व इसका उदाहरण था।करगहर, कोचस, दिनारा के आस-पास के क्षेत्र 'त्रिवेणी संघ' जैसे सामाजिक संगठन से प्रभावित रहे हैं, जिसकी आस्था एवं विश्वास मूल रूप से समता, स्वतंत्रता तथा समाजवाद में था। उसका प्रभाव काफी दिनों तक उस क्षेत्र के लोगों पर था और आज भी है। उस क्षेत्र के अधिकांश जन प्रतिनिधि समाजवादी विचारधारा में विश्वास रखने वाले चुनाव जीतते रहे हैं।राजनीतिक जीवन : स्व० शिवपूजन जी के राजनीतिक, मार्गदर्शक, लोहियावाद के प्रति समर्पित पीरो के गाँधी रामएकबाल सिंह 'वर्सी' थे। लोग बताते हैं कि साठ दशक में समाजवादी चिंतक मधु लिमये का कार्यक्रम बिक्रमगंज आने का था। किसी कारणवश वे नहीं आ सके। उसी क्रम में शिवपूजन जी की मुलाकात रामएकबाल बाबू से पहली बार हुयी थी। रामएकबाल बाबू के सान्निध्य में रहकर शिवपूजन बाबू ने 'समाजवाद एवं मानववाद', खासतौर से लोहियावादी समाजवाद का प्रशिक्षण प्राप्तकर वैचारिक राजनीति की तरफ पैर बढ़ाया था। तदोपरान्त शिवपूजन जी के अन्दर संघर्ष क्षमता एवं मूल्य चेतना दिनानुदिन बढ़ने लगी। 1974 के जे0 पी0 आन्दोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग ली। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल में रहकर ही जनता पार्टी के टिकट पर वे दिनारा विधान सभा क्षेत्र से 1977 में चुनाव लड़े। काँग्रेस के लक्ष्मण राय को हराकर वे विधायक बने ।वर्ष 1977 का चुनाव उनका दूसरा चुनाव था। इसके पूर्व सन् 1969 में संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी (संसोपा) के टिकट पर दिनारा विधान सभा क्षेत्र से वे चुनाव लड़ चुके थे, जिसमें उन्हें मात्र 5000 वोट मिले थे; और वे चुनाव हार गये।किसानों के बीच रहकर शिवपूजन बाबू ने उनके साथ हो रहे सामाजिक अन्याय एवं आर्थिक शोषण को बहुत करीब से देखा था,जिसके फलस्वरूप उनका हृदय किसानों के प्रति असिंवेदनशील हो गया था। किसानों के सवाल पर वे सदा आगे रहे। पानी के सवाल पर सन् 1990 में बीच सड़क पर लेटकर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव की गाड़ी को रोक दिया था। सन् 1980 में दिनारा क्षेत्र के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी के सवाल पर उन्हें कैद कर लिया गया था। वे करीब 26 महीना जेल में रहे।वर्ष 1987 में देश के जाने माने किसान नेता चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में शिवपूजन बाबू ने सक्रिय रूप से भाग लिया। टिकैत के आह्वान पर वे 50-60 लोगों के साथ उत्तर प्रदेश जाकर 'जेल भरो अभियान' में भाग लिए। सभी साथियों के साथ शिवपूजन बाबू को कैदकर प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) के जेल में बन्द कर दिया गया। वर्ष 1997 में महाराष्ट्र के कोंकण में विद्युत कम्पनी एनरॉन के विरूद्ध चल रहे किसान आन्दोलन में लगभग अपने 100 साथियों के साथ शिवपूजन बाबू सत्याग्रहियों को पूना के उसी जेल में रखा गया था जिसमें स्वतंत्रता आन्दोलन में महात्मा गाँधी और नेहरू जी को रखा गया था। जीवन पर्यन्त किसानों के सवाल पर हुये जनान्दोलन में वे सदा पहली पंक्ति में खड़ा मिले।देश के जाने माने समाजवादी चिंतक किशन पटनायक द्वारा वर्ष 1980 में 'समता संगठन' नामक एक राजनीतिक संगठन का गठन किया गया था। स्व० शिवपूजन जी उस संगठन के संस्थापक सदस्य थे। 'समता संगठन' का सम्मेलन बंगलौर (अब बंगलुरू) में हुआ था।'समता संगठन' के अतिरिक्त लोहिया विचार मंच, समाजवादी युवजन सभा,जैसी समाजवादी संगठनों से भी स्व० शिवपूजन जी जुड़े रहे,वैकल्पिक राजनीति' की तलाश के सवाल पर दिनांक 01 जनवरी, 1995 को महाराष्ट्र के थाणें में देश के प्रमुख समाजवादियों का एक सम्मेलन हुआ था। उस सम्मेलन में किशन पटनायक, भाई वैध, संजीव शाने, सच्चिदानन्द सिन्हा, जोशी जैकब, चंचल मुखर्जी, डॉ० स्वाति, डॉ० शोभनाथ त्रिपाठी, योगेन्द्र यादव आदि ने भाग लिया था।बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं समाजवादी नेता श्री शिवानन्द तिवारी के साथ स्व० शिवपूजन जी,समाजवादी विचारक किशन पटनायक के नेतृत्व में काफी दिनों तक समाजवादी राजनीति में सक्रिय रहे। अपने साथी के निधन पर उन लोगों ने दुःख व्यक्त किया है।समाजवाद, मानववाद तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित स्व० शिवपूजन जी के सान्निध्य में रहकर उनके क्षेत्र के कई सक्रिय कार्यकर्त्ता लोगों के बीच जाकर उनसे संवाद स्थापित करते हैं। लोकतंत्र की रक्षा करने के साथ साथ समाजवाद को अंगीकृत करने का पाठ भी पढ़ाते हैं। उनकी सोच समझ और विचारों पर शिवपूजन चलने की अवश्यकता हैं। बहुत से प्रतिनिधि ने कहा कि रा.प्रा.वि.हरिदासपुर के नाम में शिवपूजन सिंह जोडा जाय और विद्यालय के प्रांगण में मूर्ति लगाई जाए।
शोकसभा में उपस्थित बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी, विधायक विजय कुमार मंडल,विधायक संतोष कुमार मिश्रा,विधायक फतेबहादूर सिंह,विधान परिषद अशोक कुमार पान्डेय,पूर्व आईजी उमाशंकर सिदाशुं,बसपा नेता उदय प्रताप सिंह,सिपाही राय,सुग्रीम प्रसाद सिंह,जगमोहन सिंह,ओमप्रकाश सिंह,राजेश,धनन्जय और बहुत से गणमान्य लोगों उपस्थित थे।
 
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