प्रो.आरके धीमन ने पुरस्कारों की लगाई झड़ी

पीजीआई निदेशक को मिला पद्मश्री सम्मान

प्रो.आरके धीमन ने पुरस्कारों की लगाई झड़ी

  • नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति ने पद्मश्री से किया सम्मानित
  • पहले से निरंतर पुरस्कार हासिल करने का शिलशिला रहा जारी
लखनऊ। चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्यशैली को पेश करते हुए देश दुनिया से पुरस्कारों की झड़ी लगा दी है। बीते गुरूवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में एसजीपीजीआई निदेशक डॉ. राधा कृष्ण धीमन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। प्रो.धीमन वर्तमान में एसजीपीजीआई के निदेशक और कल्याण सिंह सुपरस्पेशलिटी कैंसर संस्थान के निदेशक हैं। यह दोनों संस्थान उत्तर प्रदेश सरकार के तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र हैं। डॉ.धीमन लगातार कोरोना काल के दौरान अपनी कार्यशैली को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया है। ज्ञात हो कि प्रो.धीमन उत्तर प्रदेश के कोविड प्रबंधन और कोविड-एसोसिएटेड म्यूकरमाईकोसिस पर यूपी राज्य सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
 
अत्याधुनिक राजधानी कोविड अस्पताल का निर्माण, साथ ही रोगी निरीक्षण और प्रबंधन के लिए प्रोटोकॉल एसओपी का निर्माण रिकॉर्ड प्रस्तुत किया। उस दौरान इन्होने कोविड देखभाल और शिक्षा के कई पहलुओं में टेलीमेडिसिन का भरपूर उपयोग किया गया। डॉ.धीमन ने यूपी में विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन में मार्गदर्शन, सहायता प्रदान की। कोविड अनुकूल व्यवहार का अनुशासन और क्रियान्वयन, उन्नत आरटी-पीसीआर परीक्षण, सीरोसर्विलेंस, जीनोमिक अनुक्रमण ने कोविड पाजिटिव दर को को कम करने में गहरा योगदान दिया। डॉ. धीमन को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किये हैं। उन्हें 2008 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में सर्वोच्च डॉ. बी सी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह 4 बार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद पुरस्कार के प्राप्त कर चुके हैं। उन्हें 2009 में बसंती देवी अमीर चंद, 2007 में अमृत मोदी यूनिकेम, 1997 में  शकुंतला अमीर चंद पुरस्कार और 1996 में डॉ डीवी दत्ता मेमोरियल ओरेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वह कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता हैं।  उन्हें अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर  द्वारा हेरोल्ड ओ कॉन पुरस्कार मिला है।
 
उन्हें 2012 से 2019 तक लगातार 6 वर्षों तक प्रतिष्ठित इंटरनेशनल सोसाइटी ऑन हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी एंड नाइट्रोजन मेटाबॉलिज्म का अध्यक्ष होने का सम्मान प्राप्त है। वह 2016, 2017 और 2018 में लगातार 3 वर्षों तक इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर के सचिव रहे। वह अब उसी सोसायटी के अध्यक्ष हैं। वह निरंतर दस साल 2011 से 2020 तक जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी के प्रधान संपादक रहे। वह लगातार 6 साल - 2011 से 2017 तक अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (एसीजी) के गवर्नर रहे। बता दें कि 4 जून 1960 को जन्मे डॉ. धीमन ने वर्ष 1984 और 1987 में केजीएमयू से एमबीबीएस मेडिसिन में एमडी की उपाधि प्राप्त की और 1991 में पीजीआई गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन की उपाधि प्राप्त की।
 
उन्हें अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, अमेरिकन एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ लिवर डिजीज, रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन, लंदन और एडिनबर्ग और नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज सहित कई संस्थानों से फेलो की उपाधि दी गई। बाद में वह हेपेटोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के रूप में प्रतिष्ठित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से जुड़े और 2020 में पीजीआई लखनऊ में स्थानांतरित होने से पहले पीजीआई चण्डीगढ़ के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख के पद पर आसीन हुए। डॉ.धीमन अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न पदों पर रहकर उपाधियों को लगातार हासिल करते रहे।
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