परमार्थ निकेतन से श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर समत्व का संदेश
भगवान शिव से सीखें संतुलित, समरस और करुणामय जीवन
ऋषिकेश। श्रावण के पावन चतुर्थ सोमवार के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मंगलकामनाएँ देते हुए अपने संदेश में कहा कि भगवान शिव हमें समत्व, संयम, करुणा और लोकमंगल की ओर ले जाता है। आज जब जीवन अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, विचारों में असहमति बढ़ रही है और मन निरंतर बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हो रहा है, तब शिव का समत्वमय स्वरूप समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
स्वामी ने कहा कि समत्व अर्थात् समान व्यवहार ही नहीं है बल्कि यह जीवन की परिस्थितियों के बीच अपने अंतर्मन का संतुलन बनाए रखने की साधना है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं “समत्वं योग उच्यते” अर्थात् समत्व ही योग है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय और मान-अपमान जैसी द्वंद्वात्मक परिस्थितियों में मन की संतुलित अवस्था ही योग का सार है।
ये खबर भी पढ़े : पीपलकोटी सुरंग हादसा: छह श्रमिकों की मौत, 14 घायल; दो अब भी फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारीभगवान शिव का स्वरूप इस समत्व को सहज रूप से अभिव्यक्त करता है। उनके साथ कैलास की शांति भी है और तांडव की ऊर्जा भी, वे योगी भी हैं और गृहस्थ भी, उनके मस्तक पर चंद्रमा की शीतलता है तो कंठ में हलाहल विष को धारण करने की सामर्थ् भी। उनके स्वरूप में विरोधाभास नहीं, बल्कि विविधताओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। यही शिवत्व का संदेश है, जीवन में परिस्थितियाँ अनेक हों, लेकिन अंतःकरण का संतुलन न खोएँ।
स्वामी ने कहा कि आज समाज में अनेक प्रकार के मत, विचार, जीवनशैली और दृष्टिकोण हैं। विविधता सनातन संस्कृति की शक्ति रही है। समत्व हमें सिखाता है कि असहमति हो सकती है, विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हृदय अलग नहीं होने चाहिए।
आज का युवा अनेक अवसरों के साथ अनेक दबावों से भी गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर निरंतर तुलना, सफलता का दबाव, त्वरित परिणाम की अपेक्षा और दूसरों के जीवन से अपने जीवन की तुलना, मन में असंतुलन पैदा कर सकती है। शिव का ध्यान युवाओं को यह संदेश देता है कि अपनी यात्रा को दूसरों की यात्रा से न तौलें। किसी की सफलता देखकर ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा लें, असफलता आने पर निराशा नहीं, आत्मचिंतन करें।
श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर परमार्थ निकेतन की ओर से यही संदेश है कि हम शिव के समत्व को अपने जीवन का आधार बनाएँ। सुख आए तो अहंकार न हो, दुःख आए तो विश्वास न टूटे, सफलता मिले तो सेवा बढ़े और शक्ति मिले तो विनम्रता बढ़े। शिव हमें संदेश देते हैं, बाहरी परिस्थितियाँ बदलती रहें, पर भीतर का दीपक स्थिर रहे।
आइए, इस पावन सोमवार संकल्प लें हम अपने मन में समत्व, हृदय में करुणा, वाणी में मधुरता, कर्मों में सेवा और जीवन में लोकमंगल की भावना को स्थान देंगे। महादेव की कृपा से हमारे भीतर शांति, हमारे परिवारों में प्रेम, हमारे समाज में समरसता और हमारे राष्ट्र में सुख, शांति एवं समृद्धि का विस्तार हो।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
