नए मुख्यमंत्री कार्यालय पर करोड़ों खर्च को पूर्व सीएम ने बताया फिजूलखर्ची
शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने मुख्यमंत्री कार्यालय के नए भवन के निर्माण पर 40-50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने को फिजूलखर्ची करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस मुख्यमंत्री कार्यालय से डॉ. यशवंत सिंह परमार से लेकर अब तक के मुख्यमंत्री प्रदेश का काम चलाते रहे, उसी भवन में हर दो-तीन वर्ष बाद लाखों रुपये मरम्मत और सजावट पर खर्च होते थे। इसके बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को वह कार्यालय पर्याप्त नहीं लगा और नया कार्यालय बनाया गया।
शांता कुमार ने कहा कि यह खर्च ऐसे समय में किया गया है जब हिमाचल प्रदेश पर इतिहास का सबसे अधिक कर्ज है और स्थिति यह है कि पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है। शांता कुमार ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि प्रदेश की ऐसी गंभीर आर्थिक स्थिति में मुख्यमंत्री द्वारा अपने कार्यालय पर करोड़ों रुपये खर्च करना प्रदेश के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की फिजूलखर्ची के कारण जनता में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। शांता कुमार ने दावा किया कि हाल में हुए पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ है और 11 जिला परिषदों में से 10 में भाजपा की जीत हुई है। उनके अनुसार, यह चुनाव परिणाम प्रदेश की बदलती राजनीतिक स्थिति का संकेत देते हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में मुख्यमंत्री को स्वयं बचत का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार एक समुद्र की तरह होती है और यदि एक-एक बूंद बचाई जाए तो समुद्र भर जाता है, जबकि एक-एक बूंद खर्च की जाए तो वह खाली हो जाता है।
उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने स्वयं से बचत की शुरुआत की थी। अपना एक टेलीफोन कटवाने के साथ प्रशासन के निचले स्तर तक फिजूलखर्ची पर रोक लगाई और मुख्यमंत्री के साथ चलने वाले वाहनों के काफिले को बंद किया। उनके अनुसार, इससे कम समय में करीब 50 करोड़ रुपये की बचत हुई थी, जिसे उन्होंने प्रदेश में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए खर्च किया था। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश सरकार पर कोई कर्ज नहीं था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज प्रदेश के प्रत्येक विभाग में फिजूलखर्ची हो रही है, जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर के लिए प्रदेश सरकार 30 करोड़ रुपये उपलब्ध नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि इसके कारण केंद्र सरकार के करीब 300 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हो पा रहे हैं।
शांता कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने करीब 12 वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय विश्वविद्यालय दिया था, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी धर्मशाला में इसका मुख्य परिसर नहीं बन पाया है। गौरतलब है कि बीते कल ही मुख्यमंत्री सुक्खू ने नए मुख्यमंत्री कार्यालय का उद्घाटन किया था।
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हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
