गंगा स्वच्छता का संदेश: गंगाजल से भरे ड्रम में दी गणेश जी को विदाई
भरद्वाजपुरम के आनंद अखाड़े में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने लिया स्वच्छ गंगा का संकल्प
प्रयागराज। गणेश उत्सव के दौरान गंगा को प्रदूषण से बचाने का अनूठा संदेश दिया गया। भरद्वाजपुरम स्थित आनंद अखाड़े में महंत राजेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद रंगीन रसायनों से सजी गणेश प्रतिमा का विसर्जन सीधे गंगा में न करके अखाड़े के परिसर में रखे बड़े ड्रम में गंगाजल भरकर किया गया।
विसर्जन के बाद ड्रम में मौजूद पूरे जल को पौधों और गमलों में डाल दिया गया। इस पहल के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण और गंगा संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजन में मौजूद लोगों ने संतों की इस पहल की सराहना की और इसे गंगा को स्वच्छ रखने की दिशा में अनुकरणीय कदम बताया।
महंत राजेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा हमारी आस्था का केंद्र होने के साथ जीवनदायिनी नदी भी है। धार्मिक आयोजनों में हमारी जिम्मेदारी है कि आस्था के साथ प्रकृति और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाए। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
निर्मल अखाड़े के महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने कहा कि सभी लोगों को इस पहल से सीख लेनी चाहिए। अक्सर हम अपनी छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यही गलतियां मिलकर गंगा के प्रदूषण का कारण बनती हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और गंगा में पूजन सामग्री एवं प्रतिमाओं का विसर्जन करने के बजाय पर्यावरण अनुकूल तरीके अपनाए तो गंगा को स्वच्छ रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। समाजसेवी आरके तिवारी ‘दुकानजी’ ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपरा के साथ गंगा संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए ऐसे पर्यावरण अनुकूल उपायों को अपनाएं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
