लखीमपुर-खीरी,09 सितम्बर(तरुणमित्र)। जिंदगी केवल सांसों का नाम नहीं, बल्कि उम्मीदों और संघर्षों का सफर है। लेकिन भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली में अकेलापन, बढ़ता मानसिक तनाव और निराशा कई बार इंसान को इस कगार पर ले आती है कि वह अपनी ही सांसों की डोर खुद तोड़ने का फैसला कर बैठता है। इसी गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या के प्रति समाज की सोच बदलने और लोगों को यह अहसास कराने के लिए कि "आप अकेले नहीं हैं", हर साल की तरह इस बार भी 10 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 'विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस' मनाया जा रहा है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक, भ्रम और मिथकों को दूर कर जरूरतमंदों को समय पर संबल देना है।
आत्महत्या को रोका जा सकता है....
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि आत्महत्या के विचारों को समय रहते रोका जा सकता है। यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति लगातार उदास, निराश या गुमसुम रहता है, खुद को दूसरों पर बोझ बताता है, या जीवन समाप्त करने जैसी बातें करता है, तो ऐसे संकेतों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। ऐसे संकट के समय व्यक्ति को डांटने, दोष देने या अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात को ध्यान से सुनें, उसे पूरा भावनात्मक सहयोग दें और तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करवाएं।
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला ने दी सलाह
जिला चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां किसी को भी हो सकती हैं और यह पूरी तरह से इलाज योग्य हैं। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से जनपद में परामर्श और उपचार की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली चुप्पी को तोड़ें और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में कभी संकोच न करें। परिवार के सदस्य, मित्र, शिक्षक, सहकर्मी और पूरा समाज मिलकर किसी डूबती हुई जिंदगी के लिए एक मजबूत सहारा बन सकते हैं।
जरूरत के समय तुरंत लें सहायता
यदि आपको या आपके किसी परिचित को मानसिक संबल या आपातकालीन परामर्श की आवश्यकता है, तो Tele-MANAS हेल्पलाइन: 14416 व टोल फ्री नंबर: 1800-891-4416 इन हेल्पलाइन नंबरों पर 24×7 संपर्क कर सकते हैं।
आइए, इस विशेष दिन पर यह संकल्प लें— “बात करें, सुनें, साथ दें—क्योंकि आपकी एक छोटी सी पहल किसी का बहुमूल्य जीवन बचा सकती है।”