पीडीए पर मोतशाम सिद्दीकी: जब अपने ही उठाने लगें सवाल... पढ़ें पूरी खबर
बदायूं। सियासत की बिसात भी अजीब खेल दिखाती है, कभी अपने ही अपनों से सवाल करवाती है। वादों की महफ़िल खूब सजी, हिस्सेदारी की बारी आई तो ख़ामोशी रही... बदायूं की समाजवादी राजनीति में इन दिनों यह पंक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। जब आवाज़ अपनों के बीच से उठे, तो सियासी गलियारों में उसकी गूंज और भी दूर तक सुनाई देती है। पार्टी की संगठनात्मक सूची जारी होने के बाद अपने ही नेताओं ने प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह विधानसभा अध्यक्षों की सूची में एक भी मुस्लिम चेहरा शामिल न होने पर सपा नेता मोतशाम सिद्दीकी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए पार्टी नेतृत्व का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।
सपा नेता मोतशाम सिद्दीकी ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने 15 जून को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बदायूं के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की भागीदारी का मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि इसके बावजूद जारी की गई संगठनात्मक सूची यह संकेत देती है कि मुस्लिम समाज को दर किनार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी नेतृत्व इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बदायूं में समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक पदों को लेकर समय-समय पर असंतोष सामने आता रहा है। कई बार पार्टी के ही नेता सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अपनी नाराज़गी सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते रहे हैं। ऐसे में नई संगठनात्मक सूची के बाद उठे सवालों ने एक बार फिर पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी के जिला या प्रदेश नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि पार्टी का पक्ष सामने आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
