जब भगवान अपने भक्त के अनुरोध पर उसके चौकीदार बने-- धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे
प्रतापगढ़। रामानुज आश्रम रक्षाबंधन की बहुत-बहुत बधाई बहुत-बहुत मंगल कामनाएं 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व मनाए। 28 अगस्त 2026 को उदया तिथि में श्रावण मास की पूर्णिमा का शुभ दिवस है। इसलिए आज ही के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। राखी बांधने के साथ ही साथ ठाकुर जी की पूजा और दान पूर्ण करना भी बेहद शुभ साबित होगा।
प्रातः काल सूर्योदय के पश्चात से लेकर प्रातः 10:00 बजे तक अति उत्तम है तथा दोपहर 1:00 बजे तक भी रक्षा सूत्र बांधने का विशेष लाभ है। रक्षाबंधन अपराह्ण व्यापिनी भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाया जाता है।
भद्रायांद्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।
पूर्व काल की बात है वामनावतार के समय भगवान का एक पग इस संसार को नाप लिया, तो दूसरा ब्रह्म लोक में पहुंचा जहां ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में रखे हुए धर्मद्रवा नाम के जल से भगवान के चरणों को धोया। पुनः उस जल को कमंडल में रख लिया। उस जल का नाम विष्णुपदी पड़ा। आगे चलकर वही जटाशंकरी जान्हवी त्रिपथगामिनी भागीरथी और गंगा नाम से कहलाईं ।
राजा बलि से भगवान ने कहा दो पग से तो मैंने सारे ब्रह्मांड को नाप लिया अब तीसरे पग को कहां रखूं।
राजा बलि ने सिर नीचा करके कहा कि प्रभु अब यह चरण आप मेरे सिर पर रख दीजिए। भगवान असमंजस में पड़ गए। उसी समय प्रहलाद जी आए जो राजा बलि के बाबा थे और राजा बलि उनके पुत्र विरोचन के पुत्र थे। प्रहलाद जी ने कहा प्रभु आपने जो दिया बहुत अच्छा किया और जो हरण कर लिया उससे भी अच्छा किया। उसी समय राजा बलि की पत्नी ने भगवान की बड़ी सुंदर स्तुति किया। भगवान ने प्रसन्न होकर के कहा वरदान मांगो राजा बलि ने कहा अब हमें कुछ नहीं चाहिए, किंतु भगवान ने कहा नहीं मैं जहां जाता हूं वहां कुछ देता हूं। भगवान ने उस समय राजा बलि को सुतल लोक का राज दे दिया, किंतु फिर भगवान ने कहा कि हे राजा बलि तुम कुछ और मागों। राजा बलि ने कहा कि प्रभु कुछ नहीं चाहिए किंतु भगवान ने कहा नहीं मांग लो राजा बलि ने कहा यदि आप कुछ देना चाहते हैं तो आप सुतल लोक में जब हम घर के दरवाजे से निकले तो आप हमें वही दर्शन दीजिए। भगवान ने एवमस्तु कह दिया।
इधर नारद जी ने माता लक्ष्मी जी को बताया की प्रभु तो इस समय सुतल लोक में राजा बलि के घर चौकीदारी कर रहे हैं। लक्ष्मी जी श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र लेकर राजा बलि के दरबार में पहुंची ,और लक्ष्मी जी ने राजा बलि के हाथों में रक्षा सूत्र बांध दिया। राजा बलि ने कहा कि बहन जो कुछ मांगना हो मांग लो लक्ष्मी जी स्वरूप बदलकर के गई थी। उन्होंने कहा यदि आपने मुझे बहन कहा है तो आप वचन दीजिए राजा बलि ने कहा हम वचन देते हैं जो कुछ मांगोगी हम देंगे।
माता लक्ष्मी ने कहा हमारे प्रभु आपके यहां चौकीदार बने बैठे हैं। कृपया इनको मुक्त कर दीजिए। राजा बलि ने भगवान से कहा प्रभु अब आप क्षीर सागर जाइए ।उसी दिन से श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहन अपने भाई के कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है और अपने भाई के जीवन के दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना करती है।
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लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
