मरीज की सांसें बचाने में वेंटिलेटर ही अंतिम अस्त्र नही : डा0 विवेक गुप्ता
लोहिया संस्थान में दो दिवसीय 'एमपार्व 2026' वर्कशॉप संपन्न
वेंटिलेटर के आगे की लाइफ-सपोर्ट तकनीक पर देशभर के 50 डॉक्टरों को मिली ट्रेनिंगए SWAAC ELSO चेयरमैन-इलेक्ट डॉ. विवेक गुप्ता ने सिखाए मशीन फेलियर व इमरजेंसी हैंडलिंग के गुर। "क्या आप जानते हैं कि जब वेंटिलेटर भी किसी मरीज की सांसें बचाने में नाकाम साबित हो जाता है, तब भी उम्मीद का एक रास्ता खुला रहता है? देश के चोटी के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. विवेक गुप्ता ने लखनऊ में उस 'मास्टर-की' का खुलासा किया है जो सीधे मौत को मात दे सकती है.
लखनऊ। जब फेफड़े या दिल पूरी तरह काम करना बंद कर दें और वेंटिलेटर के बावजूद शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तब 'ईसीएमओ' (एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन) जीवनरक्षक विकल्प बनता है। इसी आधुनिक तकनीक से हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को निपुण बनाने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (Dr. RMLIMS) के एनेस्थीसिया सेमिनार रूम (6th फ्लोर, एकेडमिक ब्लॉक) में दो दिवसीय गहन 'ईसीएमओ वर्कशॉप' का आयोजन किया गया। 'एमपार्व' (EMPARV - इंटरनेशनल 2026) प्रोग्राम के तहत आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के करीब 50 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
शनिवार: ईसीएमओ के बेसिक सिद्धांतों और ईसीपीआर पर मंथन
कार्यशाला के पहले दिन शनिवार (22 अगस्त) को विशेषज्ञों ने ईसीएमओ की बुनियादी जानकारी, इसके इतिहास, शरीर की कार्यप्रणाली, कैनुलेशन और एंटीकोएगुलेशन (थक्का जमने से रोकने) की तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
लोहिया संस्थान के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष व कार्यशाला के मुख्य आयोजक डॉ. पी.के. दास ने बताया कि ईसीएमओ मशीन मरीज के शरीर से खून निकालकर उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालकर खून वापस शरीर में भेजती है। संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एम. सिंह और पूर्व निदेशक डॉ. दीपक मालवीय ने स्पष्ट किया कि ईसीएमओ बीमारी का सीधा इलाज नहीं है, बल्कि यह दिल और फेफड़ों को आराम देकर ठीक होने का समय देती है।
शनिवार के तकनीकी सत्रों में डॉ. विवेक गुप्ता ने ECPR (एक्स्ट्राकॉरपोरियल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) विषय पर अहम व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे कार्डियक अरेस्ट के दौरान ईसीएमओ की मदद से मौत के मुंह में जा रहे मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसके बाद उन्होंने एक्स्ट्राकॉरपोरियल थेरेपीज (RRT, TPE और ECCO₂R) को ईसीएमओ के साथ जोड़ने की तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।
रविवार को भी छाए रहे डॉ. विवेक गुप्ता: लाइव सिमुलेशन और इमरजेंसी हैंडलिंग की ट्रेनिंग
रविवार (23 अगस्त) को कार्यशाला का पूरा फोकस व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्राइसिस मैनेजमेंट पर रहा। हीरो डीएमसी हार्ट इंस्टीट्यूट लुधियाना में कार्डिएक एनेस्थीसिया व क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख तथा ईसीएमओ सोसाइटी ऑफ इंडिया के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेक गुप्ता रविवार के सत्रों के केंद्र बिंदु रहे।
डॉ. विवेक गुप्ता ने अन्य प्रमुख फैकल्टी डॉ. प्रणय ओझा और डॉ. वेंकट गोयल (रिद्धिविनायक अस्पताल, मुंबई) के साथ मिलकर डॉक्टरों को लाइव ट्रेनिंग दी:
स्टेशन 4 (ऑक्सीजिनेटर एवं पंप फेलियर): सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक चले हैंड-ऑन वर्कशॉप स्टेशन में डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्राची सिंह और डॉ. दीप्ति शर्मा ने डॉक्टरों को सिखाया कि यदि ईसीएमओ का पंप या ऑक्सीजिनेटर अचानक फेल हो जाए, तो स्थिति को तुरंत कैसे नियंत्रित करें।
हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन सेशंस (सत्र I व II): दोपहर 12:15 से 4:45 बजे तक आयोजित सिमुलेशन सत्रों में डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रणय ओझा और डॉ. विनोद सिंह ने आईसीयू जैसी आपातकालीन स्थितियां (जैसे सर्किट में हवा आना, ब्लीडिंग, या अचानक ब्लड प्रेशर गिरना) तैयार कीं। इसमें डॉक्टरों ने इमरजेंसी में त्वरित निर्णय लेने का अभ्यास किया।
इंटरेक्टिव ईसीएमओ क्विज व समापन: शाम 4:45 बजे डॉ. विवेक गुप्ता और डॉ. प्रवीन कुमार दास ने संयुक्त रूप से एक क्विज प्रतियोगिता का संचालन किया।
कौन हैं डॉ. विवेक गुप्ता?
डॉ. विवेक गुप्ता वर्तमान में SWAAC ELSO (साउथ वेस्ट एशियन एंड अफ्रीकन कंट्रीज) के चेयरमैन-इलेक्ट हैं। पंजाब में सेलफॉस (सल्फास) जहर से पीड़ित गंभीर मरीजों को ईसीएमओ के जरिए मौत के मुंह से बाहर निकालने और नई जिंदगी देने के लिए डॉ. गुप्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है।
कार्यक्रम के समापन पर कुलसचिव डॉ. सुब्रत चंद्रा, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. आशीष झा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह सहित आयोजकों ने सभी क्विज विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किए।
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