यूपी एसटीएफ का बड़ा एक्शन: 171 दुर्लभ कछुओं के साथ अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरफ्तार, चीन तक फैला था नेटवर्क
आरोपी को कानपुर के हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास से पकड़ा गया
लखनऊ । उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कछुओं की तस्करी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को 171 दुर्लभ कछुओं के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी को कानपुर के हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास से पकड़ा गया। इस कार्रवाई को वन विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान जाहिद अली, पुत्र मोहम्मद अली, निवासी ग्राम भटपुरा, थाना कमालगंज, जनपद फतेहगढ़ के रूप में हुई है। उसके कब्जे से 171 इंडियन रूफ्ड टर्टल (Indian Roofed Turtle), एक आधार कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
लंबे समय से मिल रही थी तस्करी की सूचना
एसटीएफ को पिछले कई दिनों से प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की बड़े पैमाने पर तस्करी किए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। इस पर एसटीएफ की विभिन्न इकाइयों को सूचना जुटाने और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश्वर चन्द्र श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में चल रही जांच के दौरान पता चला कि प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय तस्कर बड़े पैमाने पर कछुओं का अवैध कारोबार कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के रास्ते विदेशों तक होती थी तस्करी
जांच में सामने आया कि तस्कर उत्तर प्रदेश से कछुओं को बिहार और पश्चिम बंगाल तक पहुंचाते थे। वहां से यह खेप बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते चीन, हांगकांग और मलेशिया जैसे देशों में भेजी जाती थी। इन कछुओं का इस्तेमाल मांस, पालतू जानवर (पेट) के रूप में तथा इनके कवच (झिल्ली) से कथित शक्तिवर्धक दवाएं बनाने के लिए किया जाता है।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
उप निरीक्षक फैजुद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में एसटीएफ की टीम कानपुर में निगरानी कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ तस्कर बड़ी संख्या में कछुओं की खेप लेकर आने वाले हैं। सूचना की पुष्टि के बाद एसटीएफ ने वन विभाग, कानपुर रेंज की टीम के साथ संयुक्त अभियान चलाया और हरबंश मोहाल रेलवे क्रॉसिंग के पास आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फतेहगढ़ और आसपास के जिलों की नदियों और तालाबों से स्थानीय तस्करों के माध्यम से कछुए इकट्ठा करता था। इसके बाद कानपुर के अन्य तस्करों के सहयोग से उन्हें बिहार और पश्चिम बंगाल भेजा जाता था, जहां से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए विदेशों में तस्करी की जाती थी।
उत्तर प्रदेश में कछुओं की कई प्रजातियां
एसटीएफ के अनुसार भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 15 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में मौजूद हैं। इनमें 11 प्रजातियों का अवैध व्यापार किया जाता है। ये कछुए गंगा, यमुना, चंबल, गोमती, घाघरा, गंडक तथा उनकी सहायक नदियों और तालाबों में पाए जाते हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा
आरोपी के खिलाफ वन रेंज कानपुर में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 40, 48ए, 51 और 57 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आगे की विधिक कार्रवाई वन विभाग द्वारा की जाएगी।एसटीएफ ने कहा कि वन्यजीवों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
