दो मेगा हाईवे परियोजनाओं से बदलेगी देश की रफ्तार, कानपुर से कबरई अब डेढ़ घंटे का सफर
केंंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली और बुंदेलखंड की दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को दी मंजूरी
कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर 7,145 करोड़ रुपये खर्च होंगे, यात्रा समय साढ़े तीन घंटे से घटकर डेढ़ घंटा होगा
- द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज से जोड़ने वाली 6-लेन सुरंग पर करीब 6,970 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के सड़क बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए दो महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे और द्वारका एक्सप्रेसवे-वसंत कुंज सुरंग परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। दोनों परियोजनाओं पर कुल मिलाकर करीब 14,115 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का दावा है कि इनसे यातायात व्यवस्था, औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स और रोजगार सृजन को नई मजबूती मिलेगी।
सबसे बड़ी परियोजना उत्तर प्रदेश के लिए स्वीकृत 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड राजमार्ग की है, जिस पर 7,145.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चार लेन वाले इस राजमार्ग को भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी की गई है। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) बीओटी (टोल) मॉडल पर विकसित करेगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कॉरिडोर 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके बनने से कानपुर और कबरई के बीच यात्रा समय वर्तमान साढ़े तीन घंटे से घटकर लगभग डेढ़ घंटे रह जाएगा। साथ ही बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और कई राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से जोड़ते हुए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
सरकार के अनुसार यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप 16 आर्थिक, 9 सामाजिक और 10 लॉजिस्टिक नोड्स को मजबूत करेगा। निर्माण के दौरान लगभग 1.20 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। वहीं दिल्ली के लिए मंजूर दूसरी बड़ी परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली 8.1 किलोमीटर लंबी छह लेन सुरंग है, जिसकी लागत 6,969.67 करोड़ रुपये होगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (मूल) योजना के तहत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर विकसित की जाएगी।
यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग तक जाएगी। इसका लगभग दो किलोमीटर हिस्सा दक्षिणी रिज वन क्षेत्र के नीचे से गुजरेगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए आधुनिक सड़क संपर्क उपलब्ध कराया जा सकेगा। परियोजना में एलिवेटेड कॉरिडोर, अतिरिक्त फ्लाईओवर और यू-टर्न जैसी आधुनिक यातायात सुविधाएं भी शामिल होंगी।
इस परियोजना के पूरा होने पर द्वारका, गुरुग्राम, आईजीआई एयरपोर्ट, पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच आवागमन तेज और सुगम होगा। साथ ही बारापुल्ला एलिवेटेड रोड के जरिए पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। सरकार का अनुमान है कि इससे निर्माण अवधि में लाखों मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राजधानी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
