परिवहन विभाग: फेसलेस सेवाओं का अपू्रवल निजी हाथों में, जवाबदेही सरकारी बाबुओं की!
शासनादेश के तहत परिवहन विभाग की सारी जनसुविधायें हुई फेसलेस व डिजिटल
पहले फिटनेस और अब डीएल व टीआर आदि सेवायें भी कॉन्टैक्टलेस व ऑटो-अप्रूव्ड
- नई व्यवस्था के दुष्परिणामों पर टीपीनगर परिवहन कार्यालय में रविवार के दिन जुटे प्रदेश भर के कर्मी
- बोले, डिजिटल सिस्टम का विरोध नहीं, मगर करे कोई-भरे कोई वाली स्थिति स्वीकार्य नहीं
लखनऊ। रविवार के दिन सरकारी तौर पर सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद प्रदेश भर से वाराणसी, आजमगढ़, कानपुर, हरदोई, बाराबंकी, गोरखपुर, अयोध्या, लखीमपुर, गाजियाबाद, मेरठ, हमीरपुर, बस्ती, बरेली, गोंडा, सीतापुर, रायबरेली, प्रयागराज आदि तमाम जनपदों के परिवहन कार्यालयों में कार्यरत बाबुओं का जमावड़ा राजधानी लखनऊ के टीपीनगर आरटीओ कार्यालय में हुआ।
इस दौरान इनके कर्मचारी एसो. से जुड़े कई संगठनिक मुद्दों पर बातचीत हुई। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की जनसेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन, संपर्क रहित (कॉन्टैक्टलेस) और ऑटो-अप्रूव्ड बनाने की प्रक्रिया के बीच रविवार को उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ के आह्वान पर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में प्रदेशभर के कर्मचारियों के गहन मंथन किया जिसकी अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने की।
ये खबर भी पढ़े : इकाना अंडरपास के पुनर्निर्माण के चलते ट्रैफिक डायवर्जन लागू, लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरीसंघ के सचिव पवन त्रिपाठी ने सभी साथी कर्मियों को संबोधित करते हुृए कहा कि शासन के 10 जुलाई 2026 के आदेश के तहत सेवाओं को पूर्णत: ऑनलाइन और समयबद्ध किया जा रहा है, लेकिन इससे भविष्य में व्यावहारिक कठिनाइयों, विभागीय राजस्व हानि तथा विधिक और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी सरकार की डिजिटल व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह चाहते हैं कि यदि निजी कंपनियों को कार्य दिया जा रहा है तो उसकी जवाबदेही भी उन्हीं की तय हो।
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"करे कोई, भरे कोई" जैसी स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। बैठक में अध्यक्ष किशन चंद्र, महामंत्री, सरफराज, विनय शाही, पंकज सिंह, केके दुबे, समेत अन्य पदाधिकारियों कर्मचारियों ने मांग की कि फेसलेस सेवा को पूरी तरह लागू करने से पहले परिवहन आयुक्त सभी कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों के साथ व्यापक संवाद करें। कर्मचारियों का कहना था कि जमीनी सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर व्यवस्था लागू की जाए, ताकि विभागीय राजस्व सुरक्षित रहे और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
