टोल टैक्स बचाने को ‘जज का पास’ लगाकर यूपी से उत्तरखंड घूमता रहा युवक!
उत्तराखंड के चमोली जिले की पुलिस ने चेकिंग अभियान में दबोचा, चालान कर पायी मुक्ति
सत्य प्रकाश/रवि
- गाजियाबाद आरटीओ में पंजीकृत है वाहन, मालिक लखीमपुर का, चलाने वाला लखनऊ का
- आईजी सुरक्षा बोले हाईकोर्ट सुरक्षा अधिकारी का जिम्मा, आरटीओ प्रवर्तन बोले फोकस करेंगे ऐसे मामलों पर
लखनऊ। शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वायरल वीडियो में लखनऊ के युवक को उत्तराखंड में चमोली जिले की पुलिस ने पकड़ा हुआ दिखा। युवक ने अपनी कार पर हाईकोर्ट जज का पास लगाया हुआ था। हलांकि बताया जा रहा है पुलिस ने मात्र चालान कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली। वहीं इस मामले में तरुण मित्र टीम ने पड़ताल की।
गाड़ी मालिक और उत्तराखंड पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपी ने साफ बताया कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य जज नहीं है। इससे सुरक्षा को लेकर गम्भीर सवाल खड़ा होते हैं। वहीं इस मामले में टीम ने आईजी सुरक्षा चंद्र प्रकाश से बात की उनका यही कहना रहा कि इसकी जिम्मेदारी हाईकोर्ट की सुरक्षा में लगे अधिकारी की है। वहीं जब एडीसीपी हाईकोर्ट सुरक्षा को फोन लगाया तो उनका कोई उत्तर नहीं मिला।
दरअसल,उत्तराखंड के चमोली जिले में कार से बद्रीनाथ जाते समय जज का स्टिकर लगाकर रौब झाड़ रहे यूपी के युवक को पुलिस ने पकड़ लिया। जब उसे पकड़ा गया तो उसने पहले खुद को जज बताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि होंडा सिटी की ये कार उसके भैया की है, जो लखनऊ में जज हैं और वह खुद भी लखनऊ का रहने वाला है।
भैया ने टोल से बचने के लिए कार पर जज का पास लगा रखा था। इसके बाद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उसका 500 रुपए का चालान किया और युवक के माफी मांगने, गलती मानने व शीशे से पास हटाने पर उसे छोड़ दिया गया। इसके बाद वह बद्रीनाथ की ओर चला गया। युवक की पहचान यूपी के लखनऊ के रहने वाले अभय सिंह के तौर पर हुई है।
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उत्तराखंड पुलिस ने मामले से जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया है। वहीं इस मामले को लेकर तरुण मित्र की टीम ने पड़ताल की। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह गाड़ी लखीमपुर खीरी जिले के गोला थाना इलाके के रहने वाले इशित सिंह की है। इशित ने बताया कि उन्होंने अपनी यह कार अपने मित्र अभय सिंह को दी थी। अभय सिंह इस गाड़ी को लेकर उत्तराखंड चला गया। इसके साथ ही इशित सिंह ने अभय सिंह का नम्बर दिया।
इशित ने बताया कि उनके परिवार का कोई सदस्य हाईकोर्ट में जज नहीं है। उनके एक परिचित हाईकोर्ट में वकील है। वहीं हाईकोर्ट के जज का पास उन्हें कैसे मिला वह इसकी जानकारी नहीं दे पाए। हाईकोर्ट के पास को लेकर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने बताया जज का पास नजारत जारी करता है। इससे जुड़ी कोई लापरवाही होती है तो इसकी भी जिम्मेदारी उसकी है।
क्या बोले जिम्मेदार अफसर...!
-तरूणमित्र टीम ने इस मामले में जब चन्द्र प्रकाश,आईजी सुरक्षा यूपी पुलिस से बात की तो उनका साफ तौर पर कहना रहा कि हाईकोर्ट की सुरक्षा देखने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी ये बनती है।
-वहीं सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की पूरी तरह अनदेखी से जुड़े प्रकरण पर जब आरटीओ प्रवर्तन गाजियाबाद संभाग डॉ. सियाराम वर्मा से बात की गयी तो उनका कहना रहा चूंकि वाहन के पेपर सभी सही है और फर्जी तरीके से पास लगाने का प्रकरण पुलिस टीम के संज्ञान में चल रहा, ऐसे में हमारी प्रवर्तन टीम का यही फोकस रहेगा कि जनपद या संभाग की सीमा के अंदर ऐसी कोई भी फर्जी पास वाहन संबंधित गतिविधि संचालित न होने पाये और पकड़े जाने पर त्वरित प्रवर्तन कार्रवाई की जायेगी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
