कपड़े की दुकान से फेसबुक तक का सफर: बाबू की रीलों को मिला लोगों का प्यार, फेसबुक ने दिया इनाम
बदायूं। कपड़े की दुकान चलाने वाले क़ाज़ी जमशेद बाबू ने कभी सोचा भी नहीं था कि शायरी और मनोरंजन के लिए बनाई गईं उनकी साधारण फेसबुक रीलें एक दिन उन्हें नई पहचान दिलाएंगी। मोबाइल और सोशल मीडिया की तकनीकी जानकारी बहुत अधिक न होने के बावजूद उन्होंने शौकिया तौर पर फेसबुक पर शायरी के वीडियो पोस्ट करना शुरू किया। इसके बाद मनोरंजन के लिए कुछ सामान्य कॉमेडी रीलें भी बनाकर फेसबुक पर डालते रहे। धीरे-धीरे उनकी रीलों को लोगों का प्यार और पसंद मिलने लगी और उनकी मेहनत रंग लाने लगी। अब उनका फेसबुक पेज मोनेटाइज हो गया है, जिससे क़ाज़ी बाबू और उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
शहर के मोहल्ला सोथा निवासी काज़ी जमशेद बाबू का कहना है कि उन्हें मोबाइल और सोशल मीडिया के तकनीकी पहलुओं की बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने फेसबुक पर शुरुआत भी किसी बड़े उद्देश्य या कमाई की सोच के साथ नहीं की थी। शायरी का शौक था और लोगों के साथ मनोरंजन से जुड़ी सामग्री साझा करने के लिए वह फेसबुक पर वीडियो पोस्ट करते थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ साधारण कॉमेडी रीलें भी बनाईं, जिन्हें लोगों ने पसंद किया और धीरे-धीरे उनके वीडियो पर लोगों की रुचि बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि वो अपने रोजमर्रा के काम के साथ-साथ समय निकालकर फेसबुक पर वीडियो पोस्ट करते रहे। न उनके पास कोई बड़ा सेटअप था और न ही सोशल मीडिया के क्षेत्र में कोई विशेष तकनीकी अनुभव। इसके बावजूद उन्होंने लगातार अपनी रुचि के अनुसार वीडियो बनाकर पोस्ट किए। उनकी इसी निरंतरता और मेहनत का परिणाम है कि अब उनका फेसबुक पेज मोनेटाइज हो गया है। फेसबुक पेज के मोनेटाइज होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों ने फोन तथा सोशल मीडिया के माध्यम से क़ाज़ी बाबू को बधाई दी। परिजनो का कहना है कि क़ाज़ी बाबू ने यह उपलब्धि बिना किसी बड़े संसाधन और विशेष तकनीकी जानकारी के अपने शौक, मेहनत और निरंतरता के दम पर हासिल की है।
क़ाज़ी बाबू की यह उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो सोशल मीडिया पर अपने हुनर और शौक को सामने लाना चाहते हैं। उनका सफर बताता है कि सोशल मीडिया पर शुरुआत करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। यदि व्यक्ति अपने काम को लगातार करता रहे और दर्शकों को पसंद आने वाली सामग्री प्रस्तुत करता रहे तो साधारण शुरुआत भी आगे चलकर बड़ी उपलब्धि में बदल सकती है। क़ाज़ी बाबू के फेसबुक पेज के मोनेटाइज होने के बाद अब उनके परिवार और शुभचिंतकों को उम्मीद है कि वह आगे भी इसी तरह मनोरंजन और शायरी से जुड़ी रीलें बनाकर लोगों का मनोरंजन करते रहेंगे और सोशल मीडिया के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
