अनुदानित यूरिया से चल रहा था तरल यूरिया बनाने का खेल
कृषि विभाग व पुलिस की छापेमारी में बड़ा खुलासा
पंसौर गांव में भारी मात्रा में यूरिया, डीईएफ, मशीनें व दो वाहन बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार; एक किशोर पुलिस संरक्षण में
कौशाम्बी। जिले में किसानों के लिए सरकार की ओर से अनुदान पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की कालाबाजारी कर उससे अवैध रूप से तरल यूरिया (डीईएफ) बनाने के गोरखधंधे का चरवा पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। पंसौर गांव में हुई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में अनुदानित यूरिया, विभिन्न कंपनियों के डीईएफ कंटेनर, तरल यूरिया बनाने की मशीनें, 1000 लीटर क्षमता की टंकियां तथा दो वाहन बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद पूरे परिसर और बरामद सामग्री को सील कर दिया गया। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. शिव शंकर चौधरी को पांच अगस्त को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि चरवा थाना क्षेत्र के पंसौर गांव स्थित एक मकान में सरकारी अनुदानित यूरिया का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर तरल यूरिया तैयार किया जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला कृषि अधिकारी के निर्देशन में गठित टीम ने चरवा पुलिस के साथ मौके पर छापा मारा।
छापेमारी में महिंद्रा डीआई वाहन से इफको की 70 बोरी (45-45 किलोग्राम) अनुदानित यूरिया बरामद हुई। इसके अलावा जीएसएफसी की 100 खाली यूरिया बोरियां, टाटा, गल्फ, भारत बेंज, इंडियन ऑयल, एचपी और आयशर कंपनियों के डीईएफ के दर्जनों कंटेनर, तरल यूरिया तैयार करने वाला पंप संयंत्र, इनवर्टर, सीसीटीवी कैमरे, फ्रीज, नए ढक्कन और अन्य उपकरण बरामद हुए। परिसर के बाहर 1000 लीटर क्षमता की 21 टंकियां भी मिलीं। वहीं एक डीसीएम वाहन में गल्फ और आयशर कंपनी के डीईएफ से भरी टंकियां भी बरामद की गईं।
जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर चरवा थाने में राजबहादुर समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने राजबहादुर पुत्र विश्वनाथ और सुनील पासी पुत्र रामराज, निवासी बड़ेगांव, थाना संदीपनघाट तथा मानवेन्द्र सिंह पुत्र स्वर्गीय सुरेंद्र प्रताप, निवासी साराडीह, थाना चकिया (चंदौली) को गिरफ्तार कर लिया। मामले में कानून का उल्लंघन करने वाले एक किशोर को भी पुलिस संरक्षण में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ विधिक कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। वहीं कृषि विभाग और पुलिस अब इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली अनुदानित यूरिया का दुरुपयोग कर अवैध रूप से डीईएफ तैयार कर बाजार में खपाने वाले इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों तक भी जुड़े हो सकते हैं।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय रोहित तिवारी कौशांबी में आधारित हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की कवरेज में लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
