उत्तर प्रदेश पुलिस का राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा विशेष अभियान
मद्यपान, ध्वनि प्रदूषण, बिना HSRP और नाबालिग ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई
सड़क दुर्घटनाओं में कमी और यातायात व्यवस्था सुधार पर फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक राज्यव्यापी विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। यह अभियान डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर और अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात निदेशालय) के पर्यवेक्षण में प्रदेशभर में संचालित किया गया।
यह विशेष अभियान 09 मई 2026 से 14 जून 2026 तक प्रत्येक सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) चलाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य उन गंभीर यातायात उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई करना था जो सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनते हैं। इनमें प्रमुख रूप से मद्यपान कर वाहन चलाना, मॉडिफाइड साइलेंसर/प्रेशर हॉर्न/हूटर के जरिए ध्वनि प्रदूषण फैलाना, बिना एचएसआरपी वाहन चलाना तथा नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना शामिल था।
ये खबर भी पढ़े : प्रभारी मंत्री ने ओमरौड़ा की रात्रि चौपाल में सुनीं जनसमस्याएं, योजनाओं की दी जानकारीअभियान के दौरान प्रदेश के सभी प्रमुख टोल प्लाजाओं और महत्वपूर्ण मार्गों पर विशेष चेकिंग टीमें तैनात की गईं। प्रत्येक लेन पर अलग-अलग टीमों की तैनाती की गई, जिन्हें टॉर्च, रिफ्लेक्टिव जैकेट, बॉडी वॉर्न कैमरा, लाउड हेलर और ब्रेथ एनालाइजर जैसे उपकरण उपलब्ध कराए गए ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बनी रहे। इस अभियान में यातायात पुलिस के साथ-साथ नागरिक पुलिस और परिवहन विभाग के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों का भी सहयोग लिया गया।
कुल 135 टोल प्लाजाओं पर 3,645 पुलिसकर्मी तैनात रहे, जिनमें निरीक्षक, उपनिरीक्षक, पुरुष एवं महिला पुलिसकर्मी तथा होमगार्ड शामिल थे। अभियान के दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने मीट एंड ग्रीट पहल के तहत यात्रियों, विशेषकर महिलाओं से संवाद किया, उनकी यात्रा संबंधी समस्याओं को सुना और सहायता प्रदान की। इसका उद्देश्य प्रवर्तन के साथ-साथ नागरिकों के प्रति संवेदनशील पुलिसिंग को बढ़ावा देना था। साथ ही, निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपर और ट्रकों की HSRP की मौके पर जांच की गई। बिना वैध नंबर प्लेट, मॉडिफाइड साइलेंसर या हूटर का उपयोग करने वालों तथा नाबालिग चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
आंकड़ों के अनुसार, अभियान अवधि में कुल 10,24,030 वाहनों की जांच की गई। इनमें मद्यपान कर वाहन चलाने के 13,431 मामले, ध्वनि प्रदूषण से जुड़े 28,477 मामले, बिना एचएसआरपी के 33,616 मामले और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के 930 मामले सामने आए। कुल मिलाकर 76,454 चालान किए गए और लगभग ₹56.91 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। पुलिस के अनुसार, पिछले वर्षों के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि सड़क दुर्घटनाओं में एक महत्वपूर्ण हिस्सा नशे में वाहन चलाने से जुड़ा है, जो विशेष रूप से रात के समय सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत नशे में वाहन चलाना एक दंडनीय अपराध है। पहली बार पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान है, जबकि दोबारा अपराध करने पर सजा और जुर्माना दोनों बढ़ जाते हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं, ध्वनि प्रदूषण न फैलाएं, अपने वाहनों में वैध एचएसआरपी लगवाएं और नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति बिल्कुल न दें। पुलिस ने इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बताया है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
