जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई के नोटिस पर सपा नेता आसिम खां का विरोध
ये जौहर विश्वविद्यालय है किसी ग्राम समाज की जगह पर या सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा करके बनाई गई मार्केट या कोई कॉलोनी नहीं है जिसे आप बुल्डोजर से ध्वस्त कर देते हैं:आसिम खां
मुजाहिद खां
रामपुर:सपा नेता आसिम ख़ान ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को यह कहकर की नक्शा पास नही है आरडीए द्वारा 15 दिन के भीतर खुद हटा लेने अन्यथा प्रशासन द्वारा बुल्डोजर से ध्वस्त करने का नोटिस दिए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा ये जौहर विश्वविद्यालय है किसी ग्राम समाज की जगह पर या सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा करके बनाई गई मार्केट या कोई कॉलोनी नही है जिसे आप बुल्डोजर से ध्वस्त कर देते हैं।ये एक विश्विद्यालय है जिसे मोहम्मद आजम खान ने बनवाया है।
ये महज़ ईट और गारे से बनी इमारतें नही हैं इसकी बुनियाद में नेता जी स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जो खुद एक अध्यापक थे,एक गुरु थे उनके आशीर्वाद की ईंटे लगी हैं।मोहम्मद आज़म ख़ान के ख़्वाब तालीम से मोहब्बत,राष्ट्र प्रेम,जज़्बात,कल्पनाएं,जीवन भर की तपस्या उनके त्याग,दर्द और आंसुओं और देश के बेहतर कल की उम्मीदों के गारे से खड़ी हुई है इसकी दीवारें,तब कहीं जाकर मोहम्मद अली जौहर विश्विद्यालय वुजूद में आया।आसिम ख़ान ने कहा कि क्या यह कल्पना से परे नहीं है कि जौहर यूनिवर्सिटी के संस्थापक मोहम्मद आज़म ख़ान करोड़ों रुपए दामन पसार कर भीख मांग कर हिंदू और मुसलमान दोनों से चंदा इकट्ठा करते हैं और विश्वस्तरीय भवनों का निर्माण कराते हैं वो थोड़े से पैसे नक्शा पास कराने में खर्च नही करेंगे।ये भी ज्ञात रहे कि ज़िला परिषद को भवनों का नक्शा पास करने का अधिकार 2017 में मिला और आरडीए को 2024 में।
जबकि यूनीवर्सिटी की आधार शिला 2006 में रखी गई और 2012 में उसका उद्घाटन हुआ।जिस गांव सिगनखेड़ा में विश्विद्यालय के भवनों के निर्माण हुआ है वो उन्ही नियमो का पालन किया गया है जो गांव में या ग्राम पंचायत में निर्माण हेतु लागू थे,अगर वह नियम सरकार के बनाए हुए कानून के मुताबिक़ नही थे तो ये 38 भवन ही क्या गावों में इसी नियमानुसार बनी हुई हजारों इमारतें अवैध हो जायेंगे।आसिम ख़ान ने कहा हमे गर्व है कि यूजीसी द्वारा घोषित किए गए 32 अवैध विश्विधालयों में जौहर विश्वविद्यालय का नाम नहीं है।इसका मतलब यह है जहां पूरी दुनिया पूरे संसार पूरे विश्व के बच्चे यहां आकर पढ़ सकते हैं और किसी भी विश्वविद्यालय में जाकर पढ़ सकते हैं इसीलिए इसे विश्वविद्यालय कहा जाता है और इसमें कहीं भी यह पाबंदी नहीं है कि किस धर्म के बच्चे पढ़ेंगे और किस धर्म के बच्चे नहीं पढ़ेंगे इसका दिल बहुत विशाल है सभी के स्वागत को बेताब रहता है।
मोहम्मद आजम खान ने इसको बनवाया है ज़रूर मगर यहां कोई भेदभाव नहीं है जिसको शिक्षा की जरूरत है वह यहां आकर पढ़ सकता है।यह विश्वविद्यालय सभी लिए तत्पर खड़ा है।ये किसी की निजी जागीर नहीं है।ये मुल्क के नौनिहालों,नौजवानों,बेटे-बेटियों की जागीर है।मोहम्मद आजम खान आज है कल नहीं होंगे हम और आप भी नही रहेंगे लेकिन यह विश्वविद्यालय 200,300 बरस तक अपने इस इलाके की प्रदेश और देश की सेवा करता रहेगा।हमारी सरकार से ये मांग है कि विश्वविद्यालय को अपनी नफरत से आजाद कर दे ताकि शिक्षण संस्थान की आबरू और हज़ारों छात्र छात्राओं का जीवन बरबाद होने से बच जाए।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
