हादसे में घायल दिव्यांग पिता की बेबसी देख पसीजा प्रशासन का दिल
डीएम ने 5 वर्षीय मासूम की सर्जरी के लिए मंजूर किए 45 हजार रुपये
जनता दर्शन में लगाई थी गुहार,गोपनीय जांच में स्थिति सही मिलने पर सदर तहसील के संपूर्ण समाधान दिवस में दी गई मदद
मुजाहिद खां
रामपुर:जनपद में मानवीय संवेदना,पारदर्शी कार्यप्रणाली और त्वरित प्रशासनिक न्याय की एक बेमिसाल नजीर देखने को मिली है।एक लाचार,दिव्यांग और सड़क हादसे का शिकार ई-रिक्शा चालक अपनी 5 वर्षीय बेटी के इलाज की आस लेकर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के पास पहुंचा था।बच्ची वैशाली की उंगलियां जन्मजात रूप से आपस में चिपकी हुई थीं,जिससे उसके हाथ खराब होने का खतरा मंडरा रहा था।मामले की गंभीरता को समझते हुए डीएम ने पहले गोपनीय जांच कराई और स्थिति की सत्यता पुष्ट होने पर सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के मौके पर चाइल्ड केयर एंड प्रोटेक्शन फण्ड से 45,000 रुपये की आर्थिक सहायता को अंतिम मंजूरी दे दी।इलाज में कोई बाधा न आए,इसलिए चेक सीधे शाहबाद गेट स्थित डॉ. आरिफ सिद्दीकी के अस्पताल (केयर सेंटर) को भेज दिया गया है,जहां आगामी मंगलवार को मासूम की प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी।
जनता दर्शन से संपूर्ण समाधान दिवस तक का सफर और त्वरित न्याय
इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन की संवेदनशीलता के साथ-साथ पारदर्शिता भी साफ नजर आई। पीड़ित पिता वीर सिंह पहले अपनी गुहार लेकर डीएम के जनता दर्शन में पहुंचे थे।जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिना समय गंवाए जिला कार्यक्रम अधिकारी के समन्वय से चाइल्ड लाइन की टीम को वीर सिंह के घर भेजा।टीम ने परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का गहन और गोपनीय सर्वे किया।जब रिपोर्ट में यह शत-प्रतिशत सच साबित हुआ कि परिवार अत्यंत अभाव में है और योजना का वास्तविक हकदार है,तो मंगलवार को सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम ने बिना किसी कागजी लालफीताशाही के पीड़ित पिता को चेक सौंप दिया।
दर्द और बेबसी से भरी पिता की दास्तां
तहसील टांडा के ग्राम फेजनगंज (पोस्ट लालपुर कला) के रहने वाले वीर सिंह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।उनके घर में दो बेटियां हैं,जिनमें से 5 वर्षीय वैशाली के हाथों की उंगलियां जन्म से ही जुड़ी हुई हैं।नियति की मार ऐसी कि वीर सिंह स्वयं एक सड़क हादसे का शिकार हो गए हैं,जिससे उनके पैर में गंभीर चोट और सूजन है और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। एक पैर से लाचार इस पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी बच्ची का इलाज करा सके।इससे पहले उन्होंने विकास भवन में भी प्रार्थना पत्र दिया था,लेकिन जब वह अपनी बच्ची के भविष्य की खातिर लड़खड़ाते कदमों से डीएम के सामने पहुंचे,तो उनकी व्यथा छुप न सकी।
मंगलवार को मिलेगी मासूम को नई जिंदगी
बालिका वैशाली की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही थी।एक हाथ की उंगलियां टेढ़ी पड़ने लगी थीं और अगर समय पर सर्जरी न होती,तो उसका हाथ हमेशा के लिए खराब हो सकता था।रामपुर के शाहबाद गेट स्थित डॉ. आरिफ सिद्दीकी के केयर सेंटर में जब बच्ची को दिखाया गया,तो उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी को अनिवार्य बताया जिसका खर्च 45,000 रुपये था।अब डीएम की संवेदनशीलता के बाद बच्ची की सभी खून की जांचें पूरी हो चुकी हैं और आने वाले मंगलवार को सुबह 6 बजे उसका ऑपरेशन किया जाएगा।नकद राशि देने के बजाय सीधे अस्पताल के नाम चेक जारी किया गया है ताकि इलाज तुरंत और बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का कार्य केवल फाइलों को निपटाना नहीं,बल्कि समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है जो पूरी तरह से टूट चुका हो।चाइल्ड केयर एंड प्रोटेक्शन फंड का उद्देश्य ही ऐसे नौनिहालों को नई जिंदगी देना है।वैशाली का सफल इलाज सुनिश्चित करना कोई सरकारी औपचारिकता नहीं है,बल्कि यह हमारा संकल्प है कि रामपुर का कोई भी बच्चा महज़ पैसों की कमी के कारण उचित चिकित्सा और एक सामान्य जीवन जीने के अधिकार से वंचित न रहे।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
