एकल नाटक 'सारा जहां हमारा है' ने जीता दर्शकों का दिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से मदर सेवा संस्थान द्वारा किरन लता की प्रस्तुति- एकल नाटक 'सारा जहाँ हमारा है का मंचन कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार, इप्टा में हुई । नाटक 'सारा जहां है हमारा' का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन और कुशल निर्देशन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी किरन लता द्वारा किया गया।
नाटक 'सारा जहां है हमारा' लखनऊ की पहचान कही जाने वाली 'गंगा-जमुनी तहजीब' के ताने-बाने पर आधारित एक बेहद मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी है। नाटक का मुख्य पात्र 'चन्दर' एक अनाथ जो अमीनाबाद में पला बढ़ा लखनऊ की तंग और ऐतिहासिक गलियों में पला-बढ़ा। एक कम पढ़ा लिखा आम युवा है। गरीबी और अभावों के तीखे थपेड़ों ने उसे वक्त-वक्त पर अंदर से झकझोरा, लेकिन वे उसके फौलादी आत्मविश्वास को डिगा नहीं सके।
जीवन के हर मोड़ पर टूटकर बिखरने के बाद भी चन्दर हिम्मत नहीं हारता, बल्कि हर बार दोगुनी मजबूती के साथ उठ खड़ा होता है। समाज की कड़वी हकीकत का सामना करते हुए भी वह अपनी इंसानियत और भलाई करने के जज्बे को कभी नहीं छोड़ता। यह नाटक आज के युवाओं को विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद और संघर्ष का दामन थामे रखने का एक सशक्त संदेश देता है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
