संघर्ष समिति ने संविदा कर्मियों को न्याय दिलाने के लिए लगाई गुहार
ऊर्जा निगमों की कार्रवाई रोकने को सरकार से हस्तक्षेप की अपील
- न्यूनतम मजदूरी, समान काम का समान वेतन और ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित करे ऊर्जा निगमों: समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा मंगलवार को उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 को मंजूरी दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि यह श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, समान काम के लिए समान वेतन, निर्धारित समय से अधिक कार्य करने पर अतिरिक्त पारिश्रमिक तथा अन्य श्रम अधिकारों का संरक्षण मिलना आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में सरकार द्वारा बनाए गए अनेक नियम और व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही हैं और ऊर्जा निगमों का प्रबंधन अपनी मनमानी व्यवस्था के अनुसार काम कर रहा है। सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के बावजूद ऊर्जा निगमों के हजारों संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ये खबर भी पढ़े : हर घर तक पहुंचेगा राष्ट्रभक्ति का संदेश, 10 से 15 अगस्त तक जनपद में निकलेगी तिरंगा यात्रा : धर्मराज मौर्यसंघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि लगभग एक वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विसेज कॉरपोरेशन का गठन किया था, लेकिन ऊर्जा निगमों में कार्यरत हजारों संविदा कर्मियों को आज तक इस निगम में शामिल नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों का शोषण लगातार जारी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी वर्षों से अत्यंत महत्वपूर्ण और जोखिमपूर्ण कार्य कर रहे हैं। अनेक कर्मचारी अपने वर्षों के कार्य अनुभव, तकनीकी दक्षता और योग्यता के अनुरूप वेतन पाने से भी वंचित हैं।
स्थिति इतनी गंभीर है कि कई संविदा कर्मियों को एक पद अथवा श्रेणी के कार्य का वेतन दिया जाता है, जबकि उनसे उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी वाले और उच्च पद के कार्य कराए जाते हैं। बिजली व्यवस्था जैसे अत्यंत जोखिमपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की विसंगति न केवल कर्मचारियों का आर्थिक शोषण है, बल्कि इससे कार्यस्थल पर सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से उसकी वेतन श्रेणी से अधिक जिम्मेदारी और जोखिम वाला कार्य कराया जाता है और उसे उसके अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता, तो यह समान कार्य के समान वेतन तथा श्रम न्याय की मूल भावना के विपरीत है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मी 33/11 केवी उपकेंद्रों, लाइनों, फीडरों, ट्रांसफार्मरों और अन्य विद्युत तंत्र के रखरखाव से लेकर फॉल्ट अटेंड करने और उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
इसके बावजूद पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जाते, काम के घंटे निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ाए जाते हैं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है। परिणामस्वरूप आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और बिजली कर्मियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कीमत पर बिजली व्यवस्था चलाने के नाम पर कर्मचारियों की जिंदगी से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निम्न मांगें की हैं
ऊर्जा निगमों में कार्यरत सभी संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को तत्काल उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विसेज कॉरपोरेशन के दायरे में शामिल किया जाए, उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 के प्रावधानों को ऊर्जा निगमों में पूरी तरह लागू कराया जाए और किसी भी संविदा कर्मी को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान न हो, समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए तथा कर्मचारी से जिस पद/श्रेणी का कार्य कराया जा रहा है, उसके अनुरूप वेतन एवं अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, निर्धारित कार्य अवधि से अधिक कार्य कराने पर ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा अतिरिक्त कार्य के लिए श्रम कानूनों में निर्धारित सभी लाभ दिए जाएं, ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों को ईपीएफ, ईएसआई, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश, बोनस, दुर्घटना क्षतिपूर्ति और अन्य सभी वैधानिक श्रम सुविधाओं का वास्तविक लाभ दिलाया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की मजदूरी संहिता तभी सार्थक होगी जब उसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक श्रमिक तक पहुंचे। ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मचारी भी उत्तर प्रदेश के श्रमिक हैं और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने में उनकी भूमिका किसी से कम नहीं है। इसलिए उनके साथ दोहरे मापदंड की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि ऊर्जा निगमों के प्रबंधन को स्पष्ट एवं बाध्यकारी निर्देश जारी कर संविदा कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विसेज कॉरपोरेशन में तत्काल शामिल कराया जाए ।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
