ग्रामीण बैंक के दैनिक वेतन एवं कैजुअल कर्मियों के नियमितीकरण किया जाय- के.के.श्रीवास्तव
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक सेवा निवृत्त कार्मिक समिति प्रतापगढ़ के क्षेत्रीय अध्यक्ष डीपी सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक सेवा निवृत्त कार्मिक समिति के पूर्व अध्यक्ष केके श्रीवास्तव ने कहा है कि आल इंडिया रीजनल रूरल बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन(AIRRBEA) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में लंबे समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, कैजुअल एवं आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण तथा समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को प्रमुखता से उठाया है।
बता दें कि 18 सितंबर 2026 को 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों को भेजे पत्र में अरेबिया ने कहा है कि अनेक आरआरबी में पिछले 15–25 वर्षों से नियमित अधीनस्थ कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई, जिसके कारण नियमित पदों के स्थान पर लंबे समय से कैजुअल एवं दैनिक वेतन कर्मियों से कार्य लिया जा रहा है। संगठन ने बताया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों, औद्योगिक न्यायाधिकरणों एवं श्रम प्राधिकरणों में चले मामलों में ऐसे कर्मियों के नियमितीकरण के संबंध में निर्देश दिए गए हैं तथा कुछ आरआरबी में न्यायालयों के निर्देशों के बाद 800 से अधिक कर्मियों का नियमितीकरण भी हुआ है।
*नियमितीकरण तक 1/30वें वेतन की मांग*
संगठन ने नियमितीकरण होने तक दैनिक वेतन, कैजुअल एवं संविदा कर्मियों को नियमित अधीनस्थ कर्मचारी के वेतन का 1/30वां प्रतिदिन हिस्सा भुगतान करने की मांग की है। पत्र में दिल्ली उच्च न्यायालय के सुमन फॉरवर्डिंग एजेंसी मामले तथा भारत सरकार के 4 सितंबर 2019 के कार्यालय ज्ञापन का उल्लेख करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुपालन की मांग की गई है।
पूर्व अध्यक्ष के.के. श्रीवास्तव ने बताया कि आरआरबी में बड़ी संख्या में दैनिक वेतन कर्मी नियमित उप-कर्मचारियों के समान कार्य कर रहे हैं, जबकि उन्हें अपेक्षाकृत कम दर पर भुगतान किया जा रहा है। संगठन ने इस व्यवस्था को समान कार्य के लिए समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप किए जाने की आवश्यकता बताया है।
उन्होंने ने कहा है कि नियमितीकरण तक न्यूनतम वैधानिक/न्यायसंगत वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए आरआरबी प्रबंधन कर्मचारी संगठनों के साथ समझौते अथवा संबंधित श्रम प्राधिकरण के समक्ष समाधान की पहल करें। उन्होंने बताया कि लंबे समय से कार्यरत गरीब एवं जरूरतमंद कर्मियों को न्याय दिलाने के लिए आरआरबी प्रबंधन, भारत सरकार एवं संबंधित संस्थाओं से सकारात्मक एवं व्यावहारिक पहल की अपेक्षा की गई है।
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लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
