बेहतर रखरखाव द्वारा रेल सुरक्षा मजबूत बनाई गई; 2026-27 में अब तक केवल दो बड़ी रेल दुर्घटनाएं
6,671 स्टेशनों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और संपूर्ण ट्रैक सर्किटिंग से युक्त बनाया गया
मानवीय चूक में कमी के लिए 10,395 रेलवे फाटक को सिग्नल सिस्टम से जोड़ कर इंटरलॉक किया गया।
गोरखपुर। केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों से टक्कर और बे-पटरी होने सहित रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। भारतीय रेल दुर्घटनाओं के कारणों में मुख्य रूप से पटरी की खराबी, इंजन/कोच की खराबी, उपकरण विफलता, मानवीय त्रुटियां आदि शामिल हैं।
भारतीय रेल दुर्घटनाओं और उनमें हताहत लोगों (रेल यात्री और रेलकर्मी शामिल हैं)
रेल परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाए गए विभिन्न सुरक्षा उपाय निम्नलिखित हैं:-
1. भारतीय रेल में सुरक्षा गतिविधियों पर व्यय में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि
2. 2. मानवीय चूक से होने वाली दुर्घटनाएं कम करने के लिए 30.06.2026 तक 6,671 स्टेशनों पर केंद्रीकृत बिंदुओं और संकेतों के संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लगाई गई
3. लेवल क्रॉसिंग पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 30.06.2026 तक ऐसे 10,395 लेवल क्रॉसिंग को सिग्नल सिस्टम से संबद्ध कर इंटरलॉक किया गया
4. विद्युत माध्यमों से ट्रैक पर उपस्थिति की पुष्टि कर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 30.06.2026 तक 6,671 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग की व्यवस्था
5. सिग्नलिंग की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर अनिवार्य पत्राचार जांच, परिवर्तन कार्य नियम, कम्पिशन ड्राइंग की तैयारी आदि विस्तृत निर्देश जारी किए गए
6. प्रोटोकॉल के अनुसार विज्ञान और प्रौद्योगिकी उपकरणों के डिस्कनेक्शन और रिकनेक्शन की प्रणाली पर पुनः जोर दिया गया है।
7. लोको पायलटों की सतर्कता बढ़ाने के लिए सभी लोकोमोटिव, विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (वीसीडी) से युक्त
8. विद्युतीकृत क्षेत्रों में सिग्नल से दो ओवरहेड इक्विपमेंट मास्ट पहले स्थित मास्ट पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं ताकि घने कोहरे के मौसम में दृश्यता में कमी होने पर चालक दल को आगे के सिग्नल के बारे में सूचित किया जा सके
9. कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों को जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस प्रदान की गई है, जिससे चालक दल को सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग गेट आदि निकटवर्ती स्थलों की दूरी का पता चल सके
10. प्राथमिक ट्रैक नवीनीकरण में 60 किलोग्राम आधुनिक ट्रैक संरचना, 90 अल्टीमेट टेन्साइल स्ट्रेंथ (यूटीएस) रेल, इलास्टिक फास्टनिंग के साथ प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर नॉर्मल/वाइड बेस स्लीपर, पीएससी स्लीपर पर फैन शेप्ड लेआउट टर्नआउट, गर्डर ब्रिज पर स्टील चैनल/एच-बीम स्लीपर से युक्त किया गया
11. मानवीय चूक में कमी के लिए पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 आदि ट्रैक मशीनों के उपयोग से ट्रैक बिछाने की गतिविधि का मशीनीकरण
12. रेल पटरी नवीनीकरण और जोड़ों की वेल्डिंग से बचने के लिए 130 मीटर/260 मीटर लंबे रेल पैनलों की आपूर्ति अधिकतम की गई जिससे सुरक्षा बेहतर हो सके।
13. रेल पटरियों में खामियों का पता लगाने और दोषपूर्ण पटरियों को समय पर हटाने के लिए अल्ट्रासोनिक दोष पहचान परीक्षण
14. लंबी पटरियों की बिछावट, एल्युमिनो थर्मिक वेल्डिंग के उपयोग में कमी और रेलों के लिए फ्लैश बट वेल्डिंग जैसी बेहतर वेल्डिंग तकनीक अपनाई गई
15. ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम और ट्रैक रिकॉर्डिंग कार द्वारा ट्रैक ज्यामिति की निगरानी
16. वेल्ड/रेल पटरियों में दरारों की जांच के लिए रेलवे ट्रैक की गश्त
17. टर्नआउट नवीनीकरण कार्यों में थिक वेब स्विच और वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग का उपयोग
18. सुरक्षित कार्यप्रणालियों के पालन के लिए कर्मचारियों की निगरानी और उन्हें प्रशिक्षित करने हेतु नियमित अंतराल पर निरीक्षण
19. ट्रैक परिसंपत्तियों की वेब आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली, ट्रैक डेटाबेस और निर्णय समर्थन प्रणाली को तर्कसंगत रखरखाव आवश्यकता तय करने और इनपुट अनुकूलित करने के लिए अपनाया गया
20. पटरियों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों, जैसे एकीकृत ब्लॉक, कॉरिडोर ब्लॉक, तथा कार्यस्थल सुरक्षा, मानसून संबंधी सावधानियां आदि से संबंधित विस्तृत निर्देश जारी किए गए
21. सुरक्षित रेल परिचालन के लिए कोच और वैगन का निवारक रखरखाव
22. पारंपरिक आईसीएफ डिजाइन के कोचों को एलएचबी डिजाइन के कोचों से बदला जा रहा है
23. ब्रॉड गेज मार्ग पर सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को जनवरी 2019 तक समाप्त किया गया
24. रेलवे पुलों की सुरक्षा का नियमित निरीक्षण, इन निरीक्षणों के दौरान स्थिति के आधार पर पुलों की मरम्मत/पुनर्वास की आवश्यकता पर विचार
25. भारतीय रेल ने सभी डिब्बों में यात्रियों की व्यापक जानकारी के लिए वैधानिक "अग्नि संबंधी सूचनाएँ" प्रदर्शित की, प्रत्येक डिब्बे में अग्नि संबंधी पोस्टर लगाए गए हैं ताकि यात्रियों को आग से बचाव के लिए विभिन्न सावधानियों और नियमों के बारे में शिक्षित और जागरूक बनाए जा सके। इनमें ज्वलनशील पदार्थ, विस्फोटक पदार्थ न ले जाने, डिब्बों के अंदर धूम्रपान निषेध, जुर्माने आदि से संबंधित संदेश शामिल
26. उत्पादन इकाइयां नवनिर्मित पावर कारों और पैंट्री कारों में अग्नि पहचान एवं शमन प्रणाली तथा नवनिर्मित कोचों में अग्नि एवं धुआं पहचान प्रणाली उपलब्ध करा रही हैं। क्षेत्रीय रेलवे द्वारा मौजूदा कोचों में भी चरणबद्ध तरीके से इन प्रणालियों को लगाने का कार्य प्रगति पर
27. कर्मचारियों की नियमित काउंसलिंग और प्रशिक्षण
28. भारतीय रेल (खुली लाइनें) सामान्य नियमों में दिनांक 30.11.2023 की राजपत्र अधिसूचना द्वारा रोलिंग ब्लॉक की अवधारणा शुरू की गई, जिसमें परिसंपत्तियों के एकीकृत रखरखाव/मरम्मत/प्रतिस्थापन का कार्य रोलिंग आधार पर 52 सप्ताह पहले योजनाबद्ध और योजना अनुसार निष्पादित किया जाता है
29. कवच का कार्यान्वयन:-
1. कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह तकनीकी रूप से एक अत्यंत उन्नत प्रणाली है, जिसके लिए उच्चतम स्तर -एसआईएल-4 की सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है।
2. कवच लोको पायलट को निर्दिष्ट गति सीमा में रेलगाड़ियां चलाने में सहायता करता है, गति सीमा बढ़ने पर यह यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है और खराब मौसम के दौरान ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने में भी मदद करता है।
3. यात्री रेलगाड़ियों पर इसका पहला फील्ड परीक्षण फरवरी 2016 में आरंभ किया गया। प्राप्त अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रणाली के स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर, 2018-19 में तीन फर्मों को कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए अनुमोदित किया गया ।
4. कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया ।
5. कवच प्रणाली के कार्यान्वयन में निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं:-
ए. प्रत्येक स्टेशन, ब्लॉक सेक्शन में स्टेशन कवच की स्थापना।
बी. ट्रैक की पूरी लंबाई में रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग लगाना।
सी. पूरे खंड में दूरसंचार टावरों की स्थापना।
डी. ट्रैक के साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना।
ई. भारतीय रेल के प्रत्येक लोकोमोटिव पर लोको कवच की व्यवस्था।
6. दक्षिण मध्य रेलवे पर 1465 रूट किलोमीटर मार्ग पर कवच संस्करण 3.2 के कार्यान्वयन और प्राप्त अनुभव के आधार पर, आगे सुधार, अंततः, कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को 16.07.2024 को अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन-आर.डी.एस.ओ. द्वारा अनुमोदित किया गया।
7. कवच संस्करण 4.0 में रेलवे के विविध नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएं शामिल । यह भारतीय रेल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय रेल ने बेहद कम समय में ही, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित, परीक्षण और तैनाती शुरू की है।
8. संस्करण 4.0 में किए गए प्रमुख सुधारों में स्थान सटीकता बढ़ी, बड़े यार्डों में सिग्नल पहलुओं की बेहतर जानकारी, ऑप्टिकल फाइबर केबल पर स्टेशन-टू-स्टेशन कवच इंटरफ़ेस और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटरफ़ेस शामिल हैं। भारतीय रेल में इन सुधारों द्वारा कवच संस्करण 4.0 बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना ।
9. व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के उपरांत, कवच संस्करण 4.0 को 13.07.2026 तक 2490 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया है,
10. 10. इसके अतिरिक्त, भारतीय रेल के सभी स्वर्णिम चतुर्भुज, स्वर्णिम विकर्ण -जीडी, उच्च-घनत्व नेटवर्क और चिन्हित खंडों में 21,937 रूट किलोमीटर पर ट्रैक किनारे कवच लगाने का कार्य जारी है
11. 12. इसके अतिरिक्त, 7,435 लोकोमोटिव और 1,200 ईएमयू/एमईएमयू में कवच लगाने का काम आरंभ किया गया है।
13. भारतीय रेल के केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थानों में कवच तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिससे की सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा सके। अब तक 94 हजार से अधिक तकनीशियनों, ऑपरेटरों और इंजीनियरों को कवच तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें लगभग 57 हजार लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं। आईआरआईएसईटी के सहयोग से ये पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं।
14. कवच परियोजनाओं पर जून 2026 तक 3874.9 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इसके लिए वर्ष 2026-27 के दौरान 2066.24 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। कार्यों की प्रगति के अनुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।
रेल दुर्घटनाओं की जांच वैधानिक निकायों, नागर विमानन मंत्रालय के अधीन रेल सुरक्षा आयोग और विभागीय जांच समितियों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार की जाती है।
संबंधित सर्किलों के रेल संरक्षा आयुक्त उचित विचार-विमर्श के बाद दुर्घटनाओं के संबंध में अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करते हैं। उनकी रिपोर्ट की सिफारिशों पर संबंधित रेलवे प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई की जाती है। कार्रवाई रिपोर्ट में पाई गई कमियों को दूर किया जाता है, जिससे ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलती है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 33 वर्षों का अनुभव रखने वाले संजय श्रीवास्तव वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के गोरखपुर ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों पर ज़मीनी रिपोर्टिंग के साथ वह निरंतर समाचार कवरेज करते हैं।
