असंक्रमणीय जमीन की रजिस्ट्री के बाद हुयी दाखिल-खारिज, उठे सवाल
तहसील अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सिराज, मोहनलालगंज संवाददाता
- राजस्व अभिलेखों में पट्टे की जमीन असंक्रमणीय दर्ज होने के बावजूद तीन बिस्वा की कर दी गई रजिस्ट्री, बिना जांच के दाखिल-खारिज का आदेश जारी होने का आरोप
मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के तमोरिया गांव में राजस्व अभिलेखों में असंक्रमणीय दर्ज पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री होने और इसके बाद दाखिल-खारिज का आदेश जारी किए जाने का मामला सामने आया है। पूरे प्रकरण में तहसील अधिकारियों की कार्यप्रणाली और राजस्व अभिलेखों की जांच-पड़ताल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि असंक्रमणीय भूमि के संबंध में नियमों के तहत जांच किए बिना ही दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी कर दी गई और आदेश खतौनी में भी दर्ज हो गया।
जानकारी के अनुसार मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के नेवाजखेड़ा मजरा तमोरिया निवासी रवीन्द्र कुमार के नाम राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 435/5 दर्ज है। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि मूल रूप से पट्टे से मिली है और वर्तमान राजस्व अभिलेखों में असंक्रमणीय भूमि के रूप में दर्ज है।इसके बावजूद रवीन्द्र कुमार ने गाटा संख्या 435 में से करीब तीन बिस्वा भूमि की रजिस्ट्री 16 अप्रैल 2026 को करोरा निवासी रोहित कुमार के पक्ष में कर दी।
और यही नहीं रजिस्ट्री के बाद मामला दाखिल-खारिज के लिए नायब तहसीलदार गोसाईगंज पी-2 के न्यायालय पहुंचा। आरोप है कि भूमि के असंक्रमणीय दर्ज होने के बावजूद संबंधित अभिलेखों की समुचित जांच-पड़ताल नहीं की गई और 14 जुलाई 2026 को दाखिल-खारिज का आदेश पारित कर दिया गया। इतना ही नहीं, आदेश के बाद दाखिल-खारिज की प्रविष्टि खतौनी में भी दर्ज कर दी गई।
अभिलेखों में असंक्रमणीय, फिर भी कैसे हो गई रजिस्ट्री.....
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व अभिलेखों में भूमि असंक्रमणीय दर्ज थी तो उसकी बिक्री की अनुमति किस आधार पर हुई। दूसरा सवाल यह है कि रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की कार्रवाई के दौरान संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच क्यों नहीं की गई। यदि भूमि असंक्रमणीय थी तो दाखिल-खारिज का आदेश जारी होने और उसके खतौनी में दर्ज होने तक की कार्रवाई पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
तहसील अधिकारियों की लापरवाही आयी सामने...
राजस्व मामलों में दाखिल-खारिज से पहले भूमि की प्रकृति और संबंधित अभिलेखों की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में असंक्रमणीय भूमि के मामले में बिना समुचित पड़ताल के आदेश जारी होने से तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि की प्रकृति की समय रहते जांच की जाती तो कथित तौर पर नियमविरुद्ध हुई इस बिक्री के बाद दाखिल-खारिज की नौबत ही नहीं आती।
| आकाश सिंह,उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज तमोरिया गांव की अंसक्रमणीय जमीन की नियमो को दरकिनार कर रजिस्ट्री होने व दाखिल खारिज होने का मामला संज्ञान में आया हैं जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी। |
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
