पहले सोमवार को ट्रेनिंग पार्टनर्स के साथ होगा संवाद
समस्याओं का समाधान करेगा कौशल विकास मिशन
लखनऊ। कौशल समाधान दिवस पर मंगलवार को ट्रेनिंग पार्टनर्स की समस्याओं को विभगीय मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने सुना और उनके समयबद्ध समाधान के लिए दिशा-निर्देश भी दिए। साथ ही इनके लंबित सभी भुगतान, असेसमेंट एवं प्रमाण-पत्र, परफॉर्मेंस गारंटी, नामांकन, प्रशिक्षार्थियों की उपस्थिति, प्लेसमेंट, प्रशिक्षण गुणवत्ता, डिजिटल पोर्टल तथा कार्रवाई से पूर्व स्पष्टीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कौशल विकास मिशन मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे वे रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। ट्रेनिंग पार्टनर्स सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी वास्तविक समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना भी विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अब हर महीने के पहले सोमवार को ट्रेनिंग पार्टनर्स के साथ संवाद किया जाएगा।
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि समस्या पुरानी हो या नई, यदि वह मिशन से संबंधित है तो विभाग उसे गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों को सभी समस्याओं की स्कीम-वाइज सूची तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें समस्या कितने समय से लंबित है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या किया जाना है, इसका स्पष्ट उल्लेख हो। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का भुगतान में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि प्रशिक्षण प्रदाताओं द्वारा रखी गई सभी समस्याओं को नोट किया गया है। अब इनका योजना-वार और प्रकरण-वार परीक्षण कर समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। असेसमेंट प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एससीवीटी के माध्यम से व्यवस्था को सक्रिय किया जा रहा है। साथ ही राजकीय आईटीआई में कार्यरत प्रशिक्षकों का पैनल तैयार कर स्थानीय स्तर पर असेसमेंट कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्लेसमेंट के चौथे ट्रेंच तथा रोजगार में युवाओं के टिकाव पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल कागजों पर प्लेसमेंट दिखाना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार दिलाकर उन्हें उस रोजगार में बनाए रखना है।
अपर निदेशक पूजा मिश्रा ने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों को अपने ट्रेड की व्यावहारिक जानकारी, सेक्टर की समझ, सॉफ्ट स्किल, इंटरव्यू कौशल और आत्मविश्वास के साथ रोजगार के लिए तैयार किया जाना चाहिए। नियमित संवाद से जमीनी समस्याओं की पहचान और उनके त्वरित समाधान के साथ योजनाओं एवं प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
