डिजिटल व्यवस्था धड़ाम: सर्वर ठप होने से रजिस्ट्री का काम ठप
सर्वर ठप होने से निबंधन कार्यालयों में दिनभर ठप रही रजिस्ट्री, बेबस लोग
- शाम 4:35 बजे शुरू हुआ सर्वर, 15 मिनट बाद फिर हुआ ठप
- देर शाम तक रुकी-रुकी चली रजिस्ट्री, भारी अव्यवस्था के बीच परेशान रहे पक्षकार
सरोजनीनगर। लखनऊ सूबे की सरकारी व्यवस्था को डिजिटल और हाईटेक बनाने के दावों की मंगलवार को पोल खुल गई। सरोजनी नगर समेत राजधानी लखनऊ के सभी निबंधन कार्यालयों (उप-निबंधक दफ्तरों) में मुख्य सर्वर ठप होने से दिनभर रजिस्ट्री का काम बुरी तरह प्रभावित रहा। करोड़ों रुपये के स्टाम्प और राजस्व शुल्क चुकाने के बावजूद सैकड़ों पक्षकार घंटों दफ्तरों के चक्कर काटने और इंतजार करने को मजबूर हुए।
10 बजते ही जुटी भीड़, फिर ध्वस्त हुई व्यवस्था
सरोजनी नगर उप-निबंधक कार्यालय में सुबह 10 बजे से ही बैनामा (रजिस्ट्री), पॉवर ऑफ अटॉर्नी और दानपत्र कराने वालों की भारी भीड़ जुट गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि समय से काम निपट जाएगा, लेकिन जैसे ही सर्वर ने काम करना बंद किया, पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। न तो दस्तावेजों की ऑनलाइन फीडिंग हो सकी और न ही बायोमैट्रिक थंब इंप्रेशन दर्ज हो पाए
10 माह के दूधमुंहे बच्चे को घर छोड़ आई महिला के छलके आंसू
प्रशासनिक अव्यवस्था का सबसे संवेदनशील दृश्य सरोजनी नगर कार्यालय में देखने को मिला। कानपुर से आई ज्योति अपने 10 महीने के दूधमुंहे बच्चे को घर पर छोड़कर आई ज्योति तक काम न होने और अनिश्चितता के कारण फूट-फूटकर रो पड़ी। पीड़िता ने रुंधे गले से कहा, "मैं छोटे बच्चे को घर पर अकेला छोड़कर जरूरी काम से आई थी, लेकिन यहां घंटों से कोई बताने वाला भी नहीं है कि काम होगा या नहीं। क्या आम जनता के समय की कोई कीमत नहीं है?" महिला की पीड़ा देखकर मौके पर मौजूद अन्य लोग भी भड़क उठे और विभागीय लापरवाही के खिलाफ नाराजगी जताई।
शाम को शुरू हुई सर्वर की 'आंख-मिचौली', देर शाम तक घसीटती रही प्रक्रिया
दिनभर के भारी ड्रामे और इंतजार के बाद शाम करीब 4:35 बजे सर्वर चालू तो हुआ, लेकिन महज 15 मिनट बाद ही दोबारा ठप हो गया। सर्वर के आने-जाने का यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। सर्वर आते ही दो-चार रजिस्ट्रियां होतीं और फिर सिस्टम बैठ जाता। इस रुकावट के बीच अधिकारी और कर्मचारी देर शाम तक जैसे-तैसे काम निपटाने में जुटे रहे, लेकिन तब तक अधिकांश लोग भूखे-प्यासे और परेशान दिखे
बैकअप व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जहां आम जनता से लेकर सरकार तक का बड़ा आर्थिक हित जुड़ा होता है, वहां मुख्य सर्वर फेल होने पर कोई मजबूत वैकल्पिक या इमरजेंसी बैकअप व्यवस्था न होना विभागीय घोर लापरवाही को दर्शाता है। जनता का सीधा सवाल है कि डिजिटल निर्भरता के बीच ऐसी तकनीकी खामियों का खामियाजा आखिर आम नागरिक क्यों भुगते मामले की जानकारी और व्यवस्था में सुधार को लेकर जब एआईजी स्टाप से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारी का फोन नहीं उठा
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
