आशाओं को नौकरी से निकालने तानाशाही पर लगे रोक: पुष्पा
लखनऊ। जब-जब प्रदेश के मुख्यमंत्री का दौरा होता है, तब-तब प्रशासन आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की जायज मांगों को दबाने और उन्हें मुख्यमंत्री तक जाने से रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक देता है। ये बातें पुष्पा तिवारी ने कही। उन्होंने बताया पिछले 21 वर्षों से अपनी मांगों के लिए संघर्षरत आशा कार्यकर्ताओं की आवाज सीधे मुख्यमंत्री तक न पहुंच सके, इसके लिए प्रशासन द्वारा बार-बार संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा तिवारी और अन्य पदाधिकारियों की घेराबंदी, पुलिस प्रशासन एवं मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी जाती है।
आज भी ब्लॉक सीएचसी भियांव पर आयोजित आशा कार्यकर्ताओं की क्लस्टर मीटिंग के दौरान ठीक यही नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना मिलते ही आलापुर के नायब तहसीलदार, एसओ जलालपुर तथा भारी संख्या में पुलिस बल व अन्य प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर मुस्तैद हो गए और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका। अधिकारियों का आश्वासन।
मौके पर मौजूद आलापुर के नायब तहसीलदार, एसओ जलालपुर, प्रभारी अधीक्षक और डॉ. बृजेश कुमार यादव सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं से ज्ञापन स्वीकार करते हुए आधिकारिक रूप से आश्वासन दिया कि आपका मांग पत्र प्राथमिकता के साथ सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। भविष्य में जब भी मुख्यमंत्री का अगला दौरा होगा, तब संगठन के प्रतिनिधिमंडल की सीधे मुख्यमंत्री से वार्ता कराई जाएगी।
प्रशासनिक पहरेबंदी और घेराबंदी पर रोष व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा तिवारी ने कहा 21 वर्षों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाली आशा बहनों को हक देने के बजाय, सरकार और प्रशासन हमें पुलिस, अधिकारियों और मजिस्ट्रेट के पहरे में कैद करना चाहता है। जब भी मुख्यमंत्री का दौरा होता है, पुलिस व तहसील प्रशासन का पूरा जोर मेरी और हमारी बहनों की घेराबंदी करने पर रहता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
