डोनर ह्यूमन मिल्क मां के दूध का विकल्प नहीं : प्रो. शालिनी
— कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर से मिल रही बच्चों को जिंदगी
लखनऊ। डोनर ह्यूमन मिल्क किसी भी स्थिति में मां के दूध का विकल्प नहीं है। " हमारा उद्देश्य केवल डोनर मिल्क उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि हर मां को उसके अपने बच्चे को स्तनपान कराने के लिए सक्षम बनाना है। डोनर मिल्क केवल तब तक दिया जाता है, जब तक मां का दूध पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो जाता। ये जानकारी कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर की नोडल एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. शालिनी त्रिपाठी ने दी।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू के कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर ने अब तक 1716 समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजातों को सुरक्षित डोनर ह्यूमन मिल्क देकर जिंदगी दी है लेकिन इस केंद्र की सबसे बड़ी सफलता ऐसी माताओं में भी स्तनपान स्थापित करना है, जिससे प्रसव के बाद शुरुआती दिनों में दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता।
हर महीने 15–20 लीटर डोनर ह्यूमन मिल्क का संग्रह
केजीएमयू के इस केंद्र में हर महीने लगभग 15 से 20 लीटर डोनर ह्यूमन मिल्क एकत्र किया जाता है। स्वास्थ्य जांच, संक्रमण की स्क्रीनिंग, पाश्चुरीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही यह दूध समय से पहले जन्मे, अत्यधिक कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजातों को दिया जाता है।
डोनर मिल्क जुटाना सबसे बड़ी चुनौती
डॉ. शालिनी के अनुसार - सुरक्षित डोनर ह्यूमन मिल्क उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है। पर्याप्त दूध बनने पर माताओं को दूध दान के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन जिन महिलाओं को हाल में रक्त चढ़ाया गया हो या जिनमें एचआईवी, सिफिलिस, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी व अन्य संक्रमण का जोखिम हो, उनका दूध स्वीकार नहीं किया जाता।
केजीएमयू में भर्ती होने वाली दो-तिहाई से अधिक महिलाएं एनीमिया से प्रभावित होती हैं। इससे संभावित दूध दाताओं की संख्या सीमित हो जाती है और सुरक्षित डोनर मिल्क जुटाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सबसे बड़ी सफलता—हर बच्चा अपनी माँ का दूध पी सकें
इसके बावजूद सीएलएमसी की सबसे बड़ी सफलता केवल डोनर ह्यूमन मिल्क उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि माताओं में स्तनपान स्थापित करना है। चिकित्सकों और लैक्टेशन काउंसलरों का प्रयास रहता है कि बच्चे को तभी डिस्चार्ज किया जाए , जब वह अपनी मां का दूध पीने लगे। डिस्चार्ज के बाद भी नियमित फॉलो-अप के माध्यम से स्तनपान से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
