लविवि में सपा छात्र सभा का विरोध प्रदर्शन
-मुख्य द्वार के सामने बैठकर नारेबाजी की
लखनऊ। मंगलवार लविवि में समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर छात्र कैंपस के अंदर से गेट नंबर-1 तक पहुंचे और मुख्य द्वार के सामने बैठकर नारेबाजी की।
करीब 25 मिनट तक चले प्रदर्शन में छात्रों ने भाजपा सरकार पर पेपर लीक की घटनाओं और अपराध पर नियंत्रण न कर पाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया। छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को टांग-टांगकर गाड़ियों में बैठाया। हिरासत में लेकर उन्हें इको गार्डन भेज दिया।
आलोक यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में ब्राह्मण समाज की बहनों के साथ बहुत अपमान हो रहा है। भाजपा सरकार 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है मगर बेटियां इस प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं। मौजूदा सरकार में बहन बेटियों के साथ रेप, हत्या जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। सीतापुर में हमारी एक बहन को हत्या के 11 दिन के बाद फंदे पर लटका दिया गया, उसको न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में बहन बेटियों को इंसाफ नहीं मिलेगा तो हम इस सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंक देंगे। प्रदर्शन में शामिल लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र अरमान ने कहा कि यह सरकार यूजीसी नेट में धांधली रोक नहीं पा रही है। छात्रों के मुद्दे पर पूरी तरह से विफल है। पेपर लीक पर कोई लगाम नहीं है। पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं करवा नहीं पाती है ऐसी सरकार छात्र हितैषी कैसे हो सकती है।
रविनंदन यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार में बहन- बेटियां बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। सीतापुर की घटना इस बात का उदाहरण है कि हमारी महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार कहती है कि हम जीरो टॉलरेंस नीति अपना रहे हैं मगर जमीन पर यह बिल्कुल विफल है। जब तक हमारी बहन को न्याय नहीं मिल जाता हम लोग सड़कों पर उतरकर संघर्ष करते रहेंगे।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से क्राइम रिपोर्टिंग में सक्रिय सत्य प्रकाश भारती अपराध से जुड़े मामलों पर गहरी पकड़ रखते हैं। तथ्यपरक रिपोर्टिंग और संतुलित प्रस्तुति उनकी कार्यशैली की पहचान है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
