अब किसी सरकारी इमदाद से वापस नहीं लौटेगा आदित्य
-अलीगंज-लखनऊ अग्निकाण्ड में जान गंवाने वाले थ्री डी आर्टिस्ट का आंसुओं के बीच किया गया अंतिम संस्कार
बिसवां से इंतखाब आलम सिद्दीकी चांद की रिपोर्ट
सीतापुर। लखनऊ के अलीगंज अग्निकाण्ड हादसे में अन्य 14 के साथ असमय ही अपनी जान गंवाने वाले कस्बा बिसवां के मोहल्ला कैथी टोला निवासी थ्री डी कैरेक्टर आर्टिस्ट आदित्य श्रीवास्तव 21वर्ष पुत्र अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव का शव जैसे ही घर पहुंचा, आंसुओं, चीखों, दहाड़ों व दर्द का ऐसा मंजर नजर आया कि हर कोई यह हृदयविदारक दृश्य देख कर अंदर तक कांप गया। इस सदमे से आदित्य के पिता एकदम स्तब्ध व खामोश दिखे तो मां कल्पना और शेष परिजनों के रूदन से वहां उपस्थित हर किसी की आंख नम हो उठी। हर कोई उस मनहूस पल को कोसता दिखा जिस क्षण हर भयानक हादसा घटा। बिल्डिंग में आग लगने पर अपनी प्राण रक्षा के प्रयास में आदित्य ने अन्य के साथ अपने आप को वहां के बाथरूम में कैद कर लिया था।
आदित्य के परिजन पुलिस, अग्निशमन दल व राहत और बचाव दल पर समय से घटनास्थल पर न पहुंचने का आरोप लगा रहे थे। जवान बेटे के शव से बार-बार लिपट कर बेहोश हो रही आदित्य की मां व भाई-बहनों की स्थिति देख कर हर किसी का कलेजा मुंह को आ रहा था। आंसुओं की झड़ी के बीच मां कल्पना यही कहती सुनी गईं कि आज अगर आदित्य अपाहिज ही हो गया होता तो उन्हें संतोष होता कि जीवित तो है। आदित्य को अब न कोई सरकारी इमदाद वापस ला सकती है और न ही कोई सांत्वना। बता दें कि आदित्य के परिवार में उससे बड़ी एक बहन मेधा व छोटी बहन निष्ठा है जबकि उसका एक अनुज धैर्य है। मंगलवार को नम आंखों व गमगीन माहौल के बीच आदित्य के शव की अंत्येष्टि कर दी गई।
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लेखक के बारे में
30 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले राम कृष्ण पांंडेय वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में सीतापुर व्यूरो प्रमुख रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ से की और इसके बाद लम्बे समय तक राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ रहते हुए अमर उजाला व हिंदुस्तान इत्यादि प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कार्य किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, सम्पादन का व्यापक अनुभव है।
