कांग्रेस- सपा के बीच सीटों को लेकर नूरा कुश्ती शुरु, 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
सपा के साथ गठबंधन पर कांग्रेस में मतभेद
राजेश सिंह
लखनऊ। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चहलकदमी तेज हो गयी है। पूर्व की तरह इस बार भी यह चुनाव एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं इंडिया गठबंधन में सपा एवं कांग्रेस के बीच सीट सेयरिंग को लेकर नूरा कुश्ती का खेल तेज हो गया है। खास बात यह है कि यह दोनों ही दल सभी 403 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं कांग्रेस में सपा के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद है। इसीलिए अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। मिशन 2027 को लेकर सपा एवं कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कई बार यह कह चुका है कि गठबंधन के साथ ही भाजपा का मुकाबला किया जायेगा। वहीं सपा प्रमुख ने हाल में कहा था कि बात सीट सेयरिंग की नहीं बात जीत की है। वहीं सपा ने अपने नेताओं से सभी सीटों पर तैयारी तेज कर दी है।
संभावित प्रत्याशी पीडीए के तहत कार्यक्र म भी कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने नेताओं से सभी 75 जिलों में सीटों के बंटवारे पर फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। साथ ही ऐसी सीटों को भी चिन्हित करने को कहा गया है जिसे कांग्रेस को दी जा सके। सपा ने कांग्रेस के लिए 60 सीटों की सूची तैयार करा ली है। साथ ही सभी सीटों पर एसपी के संभावित उम्मीदवारों की पहचान भी की जा रही है। जिससे बातचीत विफल हो जाए तो पार्टी दम खम से चुनाव मैदान में उतर सके। वहीं कांग्रेस ने भी संगठन को बूथ स्तर पर खड़ा करने के साथ ही सरकार की नीतियों एवं घटनाओं का खुलकर विरोध कर रही है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने गठबंधन के तरह 120 सीटें चिन्हित कर ली है। वह 100 सीटो से कम पर समझौता करने को कांग्रेस तैयार नहीं है। वहीं कांग्रेस में सपा के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद है। हाईकमान तो सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कई बार कह चुका है। लेकिन प्रदेश के नेता यह गठबंधन नहीं चाहते वह बसपा के साथ दोस्ती करने को आतुर दिख रहे हैं। उनका मानना है कि 2024 में सपा को जो सीटें मिली वह कांगेस की बदौलत मिली है इसलिए समझौता हो तो सम्मान जनक हो। क्योंकि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश एवं हिमांचल में सपा के साथ समझौता नहीं किया। गत लोकसभा चुनाव में भी कई दिनों की तनातनी एव तीखी बयानबाजी के बाद ही सपा ने कांग्रेस को 17 सीटें दीं, जिससे कई लोग हैरान रह गए।
ये खबर भी पढ़े : 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के सम्बन्ध अधिकारियों के साथ बैठक सम्पन्नगठबंधन को लेकर कुछ सपा नेताओं के बयान से हैरान कांग्रेस के दो दलित नेता अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया बिना पूर्व सूचना के लखनऊ में बीएसपी प्रमुख मायावती के घर पहुंच गए। हालांकि, वे मायावती से नहीं मिल सके क्योंकि उनका पूर्व में कोई अपॉइंटमेंट नहीं था। इस तरह कांग्रेस सपा के अलावा भी अन्य विकल्प की भी संभावना तलाश रही है। हालांकि कांग्रेस ने दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इससे सपा कुछ असहज हो गयी।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद चन्द्र मिश्रा ने बताया कि कांग्रेस के सपा के साथ रिश्ते खराब नहीं हैं। लेकिन सीट सेयरिंग सम्मानजनक होनी चाहिए, प्रदेश में 100 सीटों से कम पर समझौते का कोई मतलब नहीं है। हमारा संगठन पहले की तुलना में बूथ स्तर तक मजबूत हुआ है। हम प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। रहीं बात बसपा प्रमुख से मुलाकात की तो वह प्रदेश की बड़ी नेता है जिनसे शिष्टाचार के तहत मुलाकात करने हमारे नेता गये थे। उन्होंने भाजपा सरकार से हर वर्ग परेशान है इसलिए इस बार सत्ता परिवर्तन होने की संभावना प्रबल हो रही है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
