उत्तर प्रदेश में बाढ़ और जलजनित आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

डीजीपी ने उद्घाटन सत्र में लिया भाग लिया, आपदा प्रबंधन में समन्वय और तैयारी पर जोर दिया

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केवल प्रतिक्रिया तक सीमित न होकर सतत तैयारी और क्षमता निर्माण पर आधारित हो

लखनऊ। राजधानी कैंट स्थित सूर्य ऑडिटोरियम में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं मध्य कमान के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी : बाढ़ एवं बाढ़ संबंधी आपदा प्रबंधन" का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य बाढ़ एवं जलजनित आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन हेतु विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों, सशस्त्र बलों, आपदा प्रबंधन संस्थाओं तथा विषय विशेषज्ञों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना, अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाना था ।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री  स्वतंत्र देव सिंह, उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लेफ्टिनेंट जनरल योगेन्द्र डिमरी (सेवानिवृत्त), प्रमुख सचिव राजस्व उत्तर प्रदेश  अपर्णा यू०, उपाध्यक्ष बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण डॉ. उदय कांत मिश्र, जीओसी-इन-सी मध्य कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।

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उक्त संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश  राजीव कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि बाढ़ एक ऐसी आपदा है जो प्रतिवर्ष जनजीवन को प्रभावित करती है तथा अनेक बहुमूल्य जानें इसकी चपेट में आ जाती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चुनौती का सामना कोई एक विभाग अथवा राज्य अकेले नहीं कर सकता, बल्कि सभी हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास ही इसका प्रभावी समाधान हैं।

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पुलिस महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश पुलिस की आपदा प्रबंधन नीति के पाँच प्रमुख स्तंभ – Prevention, Preparedness, Prediction, Protection एवं Prompt Response – का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का लक्ष्य जलजनित घटनाओं में होने वाली प्रत्येक संभावित जनहानि को रोकना है।उन्होंने बताया कि  मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2017 में एसडीआरएफ की स्थापना के बाद प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में पीएसी की 17 बाढ़ राहत कंपनियाँ (51 प्लाटून) तथा एसडीआरएफ की 6 कंपनियाँ (18 टीमें) पूर्ण तत्परता के साथ कार्यरत हैं। लगभग 2,500 प्रशिक्षित जवान बाढ़ एवं अन्य आपदाओं से निपटने के लिए सदैव तैयार रहते हैं।
        
 पुलिस महानिदेशक ने बताया कि प्रदेश के 44 जनपदों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जिनमें 18 अति संवेदनशील 12 संवेदनशील एवं 14 सामान्य जनपद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त संसाधन एवं प्रशिक्षित मानवबल उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस एवं एसडीआरएफ के पास आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित व्यापक संसाधन उपलब्ध हैं, जिनमें मोटरबोट, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, सर्च लाइट, स्कूबा डाइविंग उपकरण, अंडर-वाटर कम्युनिकेशन सिस्टम तथा अत्याधुनिक एम्बुलेंस शामिल हैं।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि प्रदेश की बाढ़ राहत कंपनियाँ 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी घाटों पर 45 दिवसीय विशेष अभ्यास कर रही हैं, जिसमें नाव संचालन, स्कूबा डाइविंग, रोप रेस्क्यू, फर्स्ट एड, सीपीआर एवं राहत वितरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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 उन्होंने कहा कि प्रदेश में जलजनित अधिकांश दुर्घटनाएँ बाढ़ के दौरान नहीं, बल्कि धार्मिक स्नान, मेलों एवं मूर्ति विसर्जन जैसे आयोजनों के दौरान होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा घाटों की सुरक्षा हेतु विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया  लागू की गई है, जिसके अंतर्गत चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता तथा नावों के सुरक्षित संचालन जैसे प्रावधान शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन, प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती, जल क्षेत्र में बैरिकेडिंग एवं सतत निगरानी के कारण डूबने से एक भी जनहानि नहीं हुई, जो उत्तर प्रदेश पुलिस की तैयारियों और क्षमता का प्रमाण है।

 उन्होंने कहा कि यूपी-112 का इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर प्रदेश की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार है, जो चौबीसों घंटे कार्यरत रहकर वास्तविक समय में संसाधनों की निगरानी एवं त्वरित सहायता सुनिश्चित करता है।अपने संबोधन के अंत में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे तैयारी और क्षमता निर्माण की सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा जन-जागरूकता को भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल करने पर बल दिया।

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लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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