लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: तीन सड़क परियोजनाओं से बदलेगी यूपी की रफ्तार
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे समेत दो हाईवे परियोजनाओं को मिली गति
रवि गुप्ता
- बाराबंकी-बहराइच मार्ग फोरलेन बनने से तराई क्षेत्र को फायदा
- कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे से बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी मजबूत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सड़क अवसंरचना को नई मजबूती देने वाली तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही बाराबंकी-बहराइच फोरलेन हाईवे और कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजनाओं को भी गति मिली है। इन तीनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश के मध्य, पूर्वी और बुंदेलखंड क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक तेज और सुगम होने की उम्मीद है।
करीब 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे प्रदेश के दो प्रमुख शहरों के बीच यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से विकसित की जा रही इस परियोजना की लागत लगभग 4700 करोड़ रुपये बताई गई है। एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है। इसके शुरू होने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा में लगने वाला समय कम होगा तथा रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। परियोजना का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इसके उद्घाटन की तिथि को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
इसी क्रम में केंद्र सरकार ने बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग के उन्नयन को मंजूरी दी है। लगभग 102 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को दो लेन से फोरलेन में विकसित किया जाएगा। परियोजना पर करीब 7000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना पूरी होने पर बहराइच, बाराबंकी तथा आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों तक माल परिवहन और यात्री यातायात को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
ये खबर भी पढ़े : वृक्षारोपण अभियान को मुख्य अतिथि डॉक्टर मिथिलेश त्रिपाठी ने एक वृक्ष लगाकर किया शुभारंभ दूसरी ओर कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 112 किलोमीटर लंबा यह हाईवे कानपुर, फतेहपुर और हमीरपुर के रास्ते बुंदेलखंड क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा। परियोजना की लागत तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। नए ग्रीनफील्ड मार्ग के निर्माण से भारी वाहनों की आवाजाही आसान होगी और मौजूदा सड़कों पर दबाव कम किया जा सकेगा। साथ ही औद्योगिक और कृषि उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा बढ़ेगी।
सड़क अवसंरचना से जुड़ी इन परियोजनाओं को प्रदेश के आर्थिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से निवेश, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। विशेष रूप से बुंदेलखंड और तराई क्षेत्र जैसे इलाकों को इन परियोजनाओं से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य में पहले से संचालित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के बीच इन नई परियोजनाओं को उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि लोगों को जल्द बेहतर यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
