हत्या आरोपित की उम्रकैद की सजा बरकरार, अपील खारिज
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फतेहपुर के चर्चित हत्याकांड में दिनेश चंद्र शुक्ला और तीन अन्य दोषियों की उम्रकैद की सज़ा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने सजा के खिलाफ आपराधिक अपील खारिज कर दी।
यह घटना 11 अक्टूबर 2008 को थाना किशुनपुर क्षेत्र में हुई थी। मृतक भूरा सिंह ने अवधराम से एक गिरे हुए कच्चे मकान का रजिस्ट्री सौदा कराया था, जिसे लेकर विवाद चल रहा था। समझौते के लिए मृतक अपने पुत्र राजेंद्र सिंह और भाई झल्लर सिंह के साथ राम स्वरूप के पास गया था। इसी दौरान दिनेश चंद्र शुक्ला, अखिलेश चंद्र शुक्ला, अनिल कुमार शुक्ला और सुनील कुमार शुक्ला हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे और गोलीबारी कर दी, जिसमें भूरा सिंह की मौत हो गई।
ये खबर भी पढ़े : कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने परिसीमन विधेयक पर प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांगबचाव पक्ष ने एफआईआर को बैक डेट से दर्ज बताया, गवाहों की मौजूदगी पर सवाल उठाया और बैलिस्टिक रिपोर्ट में हथियारों के मेल न खाने जैसे तर्क दिए। लेकिन कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों प्रत्यक्षदर्शी गवाह घटनास्थल पर मौजूद थे और उनकी गवाही विश्वसनीय है। एफआईआर समय पर दर्ज हुई थी, देरी का कोई असर नहीं पड़ता। बैलिस्टिक रिपोर्ट में हथियार न मिलने से भी मुकदमे पर असर नहीं पड़ता।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सज़ा को सही ठहराते हुए दोषियों की सज़ा को धारा 302 आईपीसी से बदलकर धारा 302/34 आईपीसी (सामूहिक आशय सहित) कर दिया। सभी दोषी जमानत पर थे, जिनकी जमानत रद्द कर उन्हें वापस जेल भेजने का आदेश दिया गया।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
