कजली मेले में आने वाले पर्यटकों से पूछता खखरा मठ—कहाँ गई मेरी वह खूबसूरती?
महोबा। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध महोबा में कजली मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की गौरवशाली परंपरा और इतिहास से जुड़ा उत्सव है। हर वर्ष दूर-दराज से लोग कजली मेले का आनंद लेने महोबा पहुंचते हैं और मेले के साथ-साथ यहां की ऐतिहासिक धरोहरों को भी देखने निकलते हैं।
इन्हीं ऐतिहासिक स्थलों में खखरा मठ का विशेष महत्व है। जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट भी खखरा मठ को महोबा के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत स्थलों में शामिल करती है। लेकिन आज सामने आई तस्वीरें एक गंभीर सवाल खड़ा करती हैं—आखिर वह खूबसूरती कहां चली गई, जिसे देखने कभी दूर-दराज से लोग महोबा आया करते थे?
खखरा मठ की वर्तमान स्थिति देखकर इतिहास प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता होना स्वाभाविक है। जिस धरोहर को महोबा की पहचान और पर्यटन का हिस्सा बनना चाहिए, वही यदि उपेक्षा, गंदगी और बदहाल व्यवस्थाओं के बीच नजर आए तो यह सिर्फ एक इमारत की दुर्दशा नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक विरासत के प्रति उदासीनता का सवाल है।
कजली मेले के दौरान जब हजारों लोग महोबा पहुंचते हैं, तब शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारना और उन्हें आकर्षण का केंद्र बनाना पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जाता है। महोबा का इतिहास चंदेलकालीन विरासत और आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं से गहराई से जुड़ा है। ऐसे में यहां की ऐतिहासिक इमारतें आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को जीवंत रखने का माध्यम हैं।
जरूरत है कि खखरा मठ की साफ-सफाई, संरक्षण और सौंदर्यीकरण की ओर जिम्मेदार विभाग गंभीरता से ध्यान दें। यदि इस धरोहर को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए तो कजली मेले में आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण बन सकती है और महोबा के पर्यटन को नई पहचान मिल सकती है। तस्वीर सवाल कर रही है और सवाल बेहद सीधा है “जिस खखरा मठ को देखने कभी लोग दूर-दूर से आते थे, आखिर आज उसकी वह सुंदरता कहां चली गई?” अब समय है कि महोबा की इस ऐतिहासिक धरोहर को सिर्फ इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी सम्मान और संरक्षण मिले।
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लेखक के बारे में
नितिन नामदेव को पत्रकारिता क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है और वह उत्तर प्रदेश के महोबा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। समाचार लेखन और रिपोर्टिंग में सक्रिय रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
