केजीएमयू :पल्मोनरी हाइपरटेंशन के निदान और मैनेजमेंट पर हुई चर्चा
— दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश आए एक्सपर्ट्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' आयोजित की गई। " एडवांसिंग डायग्नोसिस, थेराप्यूटिक्स एंड आउटकम्स " (निदान, इलाज और नतीजों को बेहतर बनाना) थीम वाली इस दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के जाने-माने एक्सपर्ट्स पल्मोनरी हाइपरटेंशन के निदान और मैनेजमेंट में हुई नई तरक्की पर चर्चा करेंगे।
प्रो.वेद प्रकाश,विभागाध्यक्ष,पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने बताया कि यह विभाग पल्मोनरी हाइपरटेंशन वाले मरीज़ों की पूरी जांच और इलाज में सक्रिय रूप से शामिल है, खासकर उन मरीजों के मामले में उन्हें क्रोनिक लंग डिज़ीज़ (फेफड़ों की पुरानी बीमारी) और इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन और क्रोनिक थ्रोम्बो एम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं।
मरीजों की व्यवस्थित जांच के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग, इकोकार्डियोग्राफी, एडवांस्ड इमेजिंग और दूसरी जांच की जाती हैं, और जरूरत पड़ने पर कार्डियोलॉजी, रुमेटोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और दूसरी स्पेशलिटी के साथ मिलकर काम किया जाता है। उन्होंने बताया कि विभाग गंभीर रूप से बीमार मरीजों (जिन्हें पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्राइसिस और राइट वेंट्रिकुलर फेलियर की समस्या हो) के लिए खास देखभाल भी देता है। साथ ही, यह विभाग इस बीमारी की जल्दी पहचान, सही रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन (जोखिम का आकलन) और सबूतों पर आधारित इलाज को बढ़ावा देता है, क्योंकि अक्सर इस बीमारी का पता देर से चलता है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
