स्वाधीनता आंदोलन में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा
— एक सप्ताह क्रांति नायकों के नाम
लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस आयोजनों की श्रृंखला में जयहिंद वार्ता केन्द्र में पब्लिक डिबेट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पहले दिन भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में देश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के योगदान पर विचार रखें गए। कार्यक्रम संयोजक जाहिद अली ने बताया कि 9 अगस्त से 15 अगस्त तक चलने वाले इस साप्ताहिक विमर्श आयोजन को एक सप्ताह देश के क्रांतिकारियों के नाम किसी गया है। जिसमें दूसरा चरण भारत की आदिवासी और घुमंतू जनजातियों के क्रांति नायकों के योगदान पर आधारित होगा।
संचालक विमल प्रकाश ने बताया कि आज के विमर्श के लिए राजधानी लखनऊ के नदवा कालेज,शिया डिग्री कालेज,इस्लामिया कालेज, सेंटीनियल कालेज,कैथेड्रल सीनियर सेकेंड्री स्कूल को भी इस विमर्श में भाग लेने के लिए औपचारिक आमंत्रण भेजा गया। पब्लिक डिबेट के पहले आयोजन में अपने विचार रखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अन्वेष शुक्ला ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में मदरसों और दूसरे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के योगदानों पर चर्चा ज़रूरी है जिससे देश की युवा पीढ़ी तक इनके क्रांतिकारी योगदान को पहुंचाना सम्भव होगा। नदवा कालेज के रिसर्च छात्र मोहम्मद जैद नदवी के अनुसार भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने सामाजिक जागरण का काम किया। तो वही देवबंद उलेमाओं ने पारम्परिक शिक्षा के माध्यम से आजादी के आंदोलन में सहयोग किया और नदवातुल उलमा से तो अल्लामा शिबली नोमानी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी निकलकर देश के सामने आए।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
