बाराबंकी में पत्रकार को धमकी: कलम दबाने की कोशिश पर पत्रकारों का फूटा गुस्सा
"सच दबाया तो विधानसभा तक मार्च" - बाराबंकी में पत्रकारों का उग्र प्रदर्शन
मनोज शर्मा
- पत्रकार को धमकी मामले में कार्रवाई न होने से पत्रकारों में आक्रोश निकला पैदल मार्च
बाराबंकी। सच की कलम पर दबाव बनाने की कोशिश अब लोकतंत्र के लिए खुली चुनौती बन गई है। बाराबंकी में एक पत्रकार को कथित रूप से धमकी दिए जाने के मामले में कार्रवाई न होने से पत्रकार समाज में भारी आक्रोश है।
मामला एक निजी अस्पताल से जुड़ी खबर के प्रकाशन के बाद सामने आया है। आरोप है कि खबर हटवाने के लिए पत्रकार पर दबाव बनाया गया। जब पत्रकार ने तथ्यों के आधार पर खबर हटाने से इनकार किया तो उसे धमकियां दी गईं। पीड़ित पत्रकार ने संबंधित थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर है।
इसी के विरोध में गुरुवार को राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत के बैनर तले बड़ी संख्या में पत्रकार एकजुट हुए। सभी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर आरोपी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बाराबंकी से लखनऊ विधानसभा तक पैदल मार्च कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने "कलम को डराया नहीं जा सकता, सच को दबाया नहीं जा सकता" के नारे लगाए। पत्रकारों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा और प्रेस की आजादी की लड़ाई है।
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बाराबंकी की सड़कों से निकलकर सीधे लखनऊ पहुंचेगा। अब पूरे जिले की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, सवाल यह है कि क्या सच लिखने वालों को सुरक्षा मिलेगी या धमकाने वालों पर कानून का शिकंजा कसेगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
