आंदोलन : जंतर-मंतर ने गढ़े राजनीति के नए चेहरे...!
अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश के सांसदों और नेताओं की भागीदारी रही सबसे अधिक
रवि गुप्ता
- राहुल गांधी, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, संजय सिंह और सोनम वांगचुक एक मंच पर दिखे
- सपा सांसद प्रिया सरोज, विधायक डॉ. रागिनी सोनकर, आतिशी और शबाना आजमी भी आंदोलन में रहीं शामिल
लखनऊ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर वैसे तो अलग-अलग दशकों में तमाम जन आंदोलन होते आये, मगर सन 2000 के बाद न्यू इंडिया के डिजिटल वातावरण में जिस तरह से बीते दिनों निरंतर रिर्कार्ड दिनों तक जो छात्र-छात्राओं व उनके साथ जुड़ते गये अन्य तमाम क्षेत्रों, राज्यों व संगठनों के लोगों का जो आंदोलन चला, देखा जाये तो फौरी तौर पर एक आम सहमति का माहौल बनने के बाद अभी भी पूरे देश-प्रदेश में इसकी चर्चा चल रही।
सड़क से शुरू हुआ युवाओं का यह आंदोलन धीरे-धीरे करके सदन के पटल तक पहुंच गया और जिसका परिणाम यह रहा कि सरकार को भी उनके प्रमुख पेपर लीक मुद्दे को लेकर कड़े नियम-विनियिम, प्रावधान और विधेयक तक बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। हालांकि इसको लेकर दोनों तरफ से रह-रहकर तमाम प्रकार की क्रियायें-प्रतिक्रियायें, वाद-संवाद-प्रतिवाद का दौर चल रहा, मगर इन सबके बीच इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि इस युवा जन आंदोलन ने लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया के तहत चुने गये कुछ युवा सांसदों, विधायकों व जन प्रतिनिधियों को एक ऐसा व्यापक मंच दिया जहां से उनके जुबां से निकली एक-एक बात निकली तो दूर तक उसका असर रहा, यहां तक कि उनके खुद के संसदीय, विधानसभा क्षेत्रों से लेकर उनके गृह व जनपदीय क्षेत्रों में भी हर खासोआम इसको लेकर उत्साहित रहा कि उनके वोट से चुना गया नेता आज छात्र आंदोलन में भाग लेकर उनके हक की लड़ाई में साथ दे रहा। ऐसे में कहीं न कहीं उनका भरोसा अपने इन राजनेताओं की ओर निश्चित तौर पर बढ़ता दिखा जोकि किसी भी लोकतांत्रिक राज्य की सुव्यवस्था के लिये एक सकारात्मक संकेत कहा जा सकता है।
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हालिया उदाहरण, जंतर मंतर के पेपर लीक व शिक्षा मंत्री हटाओ के नारे से जुडेÞ युवा आंदोलन से समझा जा सकता है जिसमें एक तरफ लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल कर इस आंदोलन को एक शक्ल देने का काम किया तो काक्रोच जनता पार्टी की युवा टीम ने अपने अलग अलग तौर तरीके व शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दम पर इसको धार देने का काम किया। शुरूआती दिनों में लोगों को यही लगा कि यह प्रदर्शन ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं, मगर जैसे जैसे लोग जुड़ते गये तो इसका कारवां भी बढ़ता गया। नतीजा यह रहा कि नेशनल पार्टियों के प्रमुख चेहरों को भी इससे जुड़ना पड़ा जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, संजय सिंह जैसे बड़े कद के राजनेताओं ने उपरोक्त प्रदर्शन कारियों संग मंच साझा किये।
लेकिन इन्हीं बड़े नेताओं के बीच और उनके अगल बगल इन युवा छात्रों संग ताल से ताल मिला रहे कुछ अन्य युवा सांसदों व नेताओं ने भी पूरे देश प्रदेश का ध्यान उनकी आकृष्ट कराने का काम किया और उसमें भी खासकर यूपी से जुड़े जन प्रतिनिधियों की भागीदारी इसमें सबसे अधिक देखने को मिली। उसमें भी सबसे प्रमुख राजनीति चेहरा यूपी के पूर्वांचल इलाके की मछलीशहर संसदीय सीट से सपा की युवा महिला सांसद प्रिया सरोज ने बहुत ही तल्लीनता और प्रमुखता से जंतर मंतर के छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया और कभी अल सुबह तो कभी देर रात तक छात्रों के साथ धरने स्थल पर बैठी रहीं।
वहीं उन्हीं के संसदीय क्षेत्र के मछलीशहर सदर विधानसभा की सपा महिला विधायक डा. रागिनी सोनकर ने भी जंतर मंतर पहुंचकर छात्रों के दर्द को समझा और जिम्मेदार सरकारी सिस्टम को अपने तर्कों से खूब लताड़ा। इसी श्रेणी में दिल्ली की पूर्व सीएम व आप पार्टी की तेजतर्रार महिला नेता आतिशी भी जंतर मंतर पहुंचीं मगर उनकी उपस्थिति का असर वैस नहीं प्रतीत हुआ, जिसके लिये वो जानी जाती हैं।
यूपी के सुल्तानपुर निवासी व राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने जमकर जंतर मंतर के मंच से पेपर लीक व शिक्षा मंत्री हटाओ से जुड़े विषयों को लेकर सरकारी सिस्टम को फटकार लगायी और धरना दे रहे युवा छात्रों संग कई बार कंधे से कंधा मिलाकर चलता दिखे तो वहीं अभिनेत्री शबाना आज़मी भी वहां पहुंचकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन में भागदारी की और अपना पक्ष रखा। राजनीतिक जानकारों का लब्बोलुआब यही मत है कि जंतर मंतर ने अबकी बार के इस प्रदर्शन ने बदलती हुई राजनीति के कुछ ऐसे नये चेहरे गढ़े जिनकी गूंज कहीं न कहीं फ्यूचर पालीटिक्स के एक नये चैप्टर को रेखांकित करती महसूस हुई।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
