संविदा कर्मियों के शोषण पर उठे सवाल, 18 हजार रुपये वेतन सुनिश्चित करने की मांग
संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम में शामिल न करने से हो रहा है शोषण, बढ़ रही हैं दुर्घटनाएं और बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है प्रतिकूल प्रभाव
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किए जाने के बावजूद ऊर्जा निगमों के हजारों संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को आज तक उसके दायरे में नहीं लाया गया है। इसके कारण संविदा कर्मियों का आर्थिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक शोषण लगातार जारी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मी बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा तथा सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। अनेक स्थानों पर कार्य के अनुरूप अनुबंध नहीं किए गए हैं तथा निर्धारित मानकों के विपरीत कम वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
ये खबर भी पढ़े : जनपद मीरजापुर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई महाराणा प्रताप जयंती, युवाओं ने निकाली रैलीसंघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली आउटसोर्स कर्मियों की लगातार हो रही दुर्घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। पिछले 49 दिनों में 56 बिजली आउटसोर्स कर्मी दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं, जिनमें 30 कर्मियों की मृत्यु तथा 26 गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह स्थिति ऊर्जा निगम प्रबंधन की संविदा कर्मियों के प्रति उपेक्षापूर्ण नीति को दर्शाती है। बड़े पैमाने पर अनुभवी कर्मियों को हटाए जाने तथा प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
संघर्ष समिति की मांग है - ऊर्जा निगमों के सभी संविदा कर्मियों को तत्काल आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए, सभी आउटसोर्स कर्मियों के लिए न्यूनतम रु18,000 प्रतिमाह वेतन सुनिश्चित किया जाए, कार्य के अनुरूप विधिवत अनुबंध किए जाएं तथा आउटसोर्स सेवा निगम के प्रावधानों के अनुसार वेतन भुगतान कराया जाए, पावर कॉरपोरेशन के आदेशों एवं माननीय ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए,बिजली कर्मियों की दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण एवं आवश्यक जनशक्ति उपलब्ध कराई जाए, दुर्घटना के शिकार कर्मियों के निःशुल्क एवं कैशलेस उपचार की व्यवस्था की जाए तथा मृतक कर्मियों के आश्रितों को समुचित आर्थिक सहायता एवं रोजगार प्रदान किया जाय। संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजली कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न की कार्यवाहियां समाप्त कर औद्योगिक संबंधों को सामान्य बनाया जाए तथा संवाद की बंद प्रक्रिया पुनः शुरू की जाए।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
