हर बुधवार को होगी भूमि से जुड़े वादों की सुनवाई
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने का निर्णय लिया है। अब आरक्षित , शासकीय , ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से भूमि से संबंधित सभी वादों की सुनवाई तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू की गयी है। इसका उद्देश्य संवेदनशील मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, न्यायिक गुणवत्ता और एकरूपता करना है। यह व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है, जिसके तहत लखनऊ एवं प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इन श्रेणी के लंबित और नए वाद अब विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब परिषद की एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट द्वारा नहीं की जाएगी।
इन मामलों पर विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ सामूहिक रूप से विचार करेगी। इससे महत्वपूर्ण मामलों में विभिन्न न्यायिक दृष्टिकोणों का समावेश होगा और निर्णय प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बन सकेगी। उन्होंने बताया कि राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज न्यायालयों के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। इन विशेष पीठों द्वारा प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों की पहचान कर उन्हें निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराने के निर्देश दियेगये है। इससे मामलों के लंबित रहने की संभावना कम होगी। डिजिटल भू-अभिलेख, आॅनलाइन नामांतरण एवं अन्य राजस्व सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भूमि पैमाइश, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कदमों ने राजस्व व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाया है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
